
स्वपन दासगुप्ता राज्यसभा में दोबारा मनोनीत हुए, जानकारों ने कहा- असंवैधानिक
The Wire
पूर्व पत्रकार स्वपन दासगुप्ता पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर तारकेश्वर सीट से खड़े हुए थे और हार गए. अब राज्यसभा सीट से इस्तीफ़ा देने के बावजूद वे दोबारा मनोनीत होकर वे सदन में अपना बाकी कार्यकाल पूरा करेंगे.
नई दिल्ली: सरकार ने पूर्व पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता को राज्यसभा में मनोनीत किया है. दासगुप्ता ने कुछ समय पूर्व उच्च सदन के मनोनीत सदस्य के रूप में इस्तीफा देकर भाजपा के टिकट पर पश्चिम बंगाल का चुनाव लड़ा था जिसमें वह हार गए थे. मार्च महीने में राज्यसभा में निर्दलीय सांसद के पद पर रहते हुए उनके भाजपा के टिकट पर बंगाल का विधानसभा चुनाव लड़ने पर हुए विवाद के बाद उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था. दासगुप्ता ने तारकेश्वर सीट से चुनाव लड़ा था और हार गए थे. गृह मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया है, ‘भारत के संविधान के अनुच्छेद 80 के उपबंध (1) के भाग (ए) तथा इसी अनुच्छेद के उपबंध (3) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति श्री स्वप्न दासपगुप्ता को उनके इस्तीफे से खाली हुई सीट को भरने के लिए राज्यसभा के लिए पुन: मनोनीत करते हुए प्रसन्न हैं. उनका यह मनोनयन 24 अप्रैल, 2022 को राज्यसभा में पूरा होने वाले उनके कार्यकाल की बाकी अवधि के लिए है.’
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?

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