
'स्टॉप क्लॉक रूल, नो-बॉल पर कैच की समीक्षा...', ICC ने प्लेइंग कंडीशन्स में किए बड़े बदलाव
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आईसीसी ने प्लेइंग कंडीशन्स में कई बदलावों को मंजूरी दी है. इसमें बाउंड्री से जुड़े नए नियम और वनडे इंटरनेशनल में 35 ओवर के बाद सिर्फ एक गेंद का इस्तेमाल करना भी शामिल है. इसके अलावा भी आईसीसी ने प्लेइंग-11 कंडीशन्स में बड़े बदलाव किए हैं.
क्रिकेट जगत में अभी ब्लॉकबस्टर मुकाबलों का दौर जारी है. भारत और इंग्लैंड के बीच जहां पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है, जिसका पहला मुकाबला लीड्स में हुआ. वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम वेस्टइंडीज दौरे पर है, जहां वो मेजबान टीम के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में व्यस्त है. बांग्लादेश और श्रीलंका के बीच भी दो मैचों की टेस्ट सीरीज का आयोजन हो रहा है.
क्रिकेटिंग सीजन के बीच ही इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने प्लेइंग कंडीशन्स में कई बदलावों को मंजूरी दी है. इसमें बाउंड्री से जुड़े नियम और वनडे इंटरनेशनल में 35 ओवर के बाद सिर्फ एक गेंद का इस्तेमाल करना शामिल है. इसके अलावा भी आईसीसी ने प्लेइंग-11 कंडीशन्स में बड़े बदलाव किए हैं. कुछ नियम वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के नए चक्र (2025-27) से लागू हो गए. वहीं व्हाइट बॉल क्रिकेट से जुड़े नियम 2 जुलाई से प्रभावी होंगे....
टेस्ट क्रिकेट में भी स्टॉप क्लॉक रूल व्हाइट बॉल क्रिकेट की तरह अब टेस्ट क्रिकेट में भी आईसीसी ने स्टॉप क्लॉक रूल लागू करने का फैसला किया है. अब हर ओवर के बाद अगला ओवर 60 सेकंड के भीतर शुरू करना होगा. देरी होने पर पहली दो बार चेतावनी मिलेगी. वहीं तीसरी बार देरी होने पर बल्लेबाजी करने वाली टीम को 5 रन पेनल्टी के तौर पर दिए जाएंगे. हर 80 ओवर के बाद ये वॉर्निंग रीसेट हो जाएगी, यानी फिर से दो बार अंपायर वॉर्निंग दे सकता है. घड़ी को 0 से 60 तक ऊपर की ओर गिना जाएगा, यानी सीधी गिनती होगी. यह रूल वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के नए चक्र की शुरुआत से लागू हो गया है.
लार लगाने पर तुरंत गेंद नहीं बदली जाएगी गेंद पर लार (Saliva) के इस्तेमाल पर पाबंदी जारी रहेगी, लेकिन लार से संबंधित नियम में कुछ बदलाव किया गया है. अब यदि गेंद पर किसी खिलाड़ी ने लार लगाया, तो अंपायर तुरंत गेंद नहीं बदलेगा. अगर गेंद बहुत गीली हो जाए या उसमें ज्यादा चमक हो, तभी गेंद बदली जाएगी. नियम में बदलाव इसलिए हुआ है ताकि कोई खिलाड़ी जानबूझकर लार लगाकर बॉल चेंज कराने की कोशिश न करे. अगर Saliva का असर नहीं दिखा तो गेंद नहीं बदली जाएगी. अगर उसके बाद गेंद में खास मूवमेंट दिखा, तब भी गेंद नहीं बदली जाएगी. लेकिन बल्लेबाजी टीम को 5 रन पेनल्टी के तौर पर मिलेंगे.
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DRS को लेकर नया प्रोटोकॉल DRS (निर्णय समीक्षा प्रणाली) से जुड़े रूल में भी बदलाव हुआ. उदाहरण के लिए किसी बल्लेबाज को कैच आउट दिया जाता है और उसने DRS लिया. फिर अल्ट्राएज में दिखा कि गेंद बैट पर नहीं लगी, सिर्फ पैड पर लगी थी. ऐसे में टीवी अंपायर पहले के नियमानुसार सिर्फ LBW की जांच करता. अगर अंगर अंपायर्स कॉल आता, तो बल्लेबाज को नॉट आउट माना जाता था. लेकिन अब एलबीडब्ल्यू जांच में भी मूल निर्णय आउट रहेगा. यानी अगर एलबीडब्ल्यू चेक के दौरान अंपयार्स कॉल आता है तो बल्लेबाज आउट माना जाएगा.

2003 के क्रिकेट वर्ल्ड फाइनल में भारतीय टीम खिताब जीतने के लिए मैदान पर उतरी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में ये सपना टूट गया था. रिकी पोंटिंग की तूफानी पारी, वीरेंद्र सहवाग की अकेली जंग और 'स्प्रिंग बैट' की रहस्यमयी अफवाहों ने इस मुकाबले को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास की सबसे चर्चित और यादगार कहानी बना दिया.












