
सीरिया में तुर्की ऐसे बना सबसे ताकतवर विदेशी खिलाड़ी... NATO से दोस्ती और रूस से साझेदारी भी
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तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने सीरिया में विद्रोहियों का समर्थन कर असद सरकार को कमजोर किया, वहीं NATO और रूस के साथ अपने रिश्ते संतुलित रखे. उनकी दोहरी रणनीति ने तुर्की को सीरिया में सबसे ताकतवर विदेशी खिलाड़ी बना दिया है.
सीरिया के दमिश्क पर कब्जा कर अबु मोहम्मद अल-जुलानी ने रविवार को राष्ट्रपति बशर अल-असद के 24 साल पुराने शासन का अंत कर दिया. इस्तांबुल की मीनारों के साये में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन सीरिया में तेजी से बदलते हालात पर अपनी खुशी छिपा नहीं सके. नमाज के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अर्दोआन ने सीरिया में 'नई हकीकत' का जिक्र किया और कहा, 'सीरिया हर जातीय, धार्मिक और सांप्रदायिक समुदाय के साथ सिर्फ सीरियाई लोगों का है.'
यह बयान न सिर्फ एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव था, बल्कि इसने सीरियाई युद्ध में तुर्की की उलझी हुई भूमिका को भी दिखाता है. सीरिया में गृह युद्ध के दौरान तुर्की ने एक ओर विद्रोही गुटों का समर्थन किया, वहीं साथ ही NATO और रूस के साथ अपने संबंधों को भी संतुलित रखा.
सीरिया में तुर्की का रोल
पिछले एक दशक से सीरिया कई देशों के हितों का अखाड़ा बना हुआ है, जिसमें तुर्की की भूमिका बेहद अहम रही है. अंकारा ने लंबे समय से उन विद्रोही गुटों का समर्थन किया जो रूस और ईरान समर्थित बशर अल-असद सरकार को हटाना चाहते थे. तुर्की का मकसद सीरिया में ऐसी सरकार बनाना था, जो उसकी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और कुर्दिश गुटों को स्वायत्तता से रोके.
जटिल समीकरण
हालांकि, तुर्की की मुश्किलें इस वजह से बढ़ती हैं कि वह NATO का सदस्य है और असद के सहयोगी रूस से उसकी नीतियां अक्सर टकराती हैं. इसके बावजूद अर्दोआन ने रूस के साथ रिश्ते बनाए रखे और कभी उनके हितों के साथ चले, तो कभी खिलाफ.

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