
सीरियल किलर 'जैक द रिपर' का सुलझा रहस्य! शख्स का दावा, 130 साल बाद मिला बड़ा सबूत
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इतिहास के सबसे कुख्यात और अज्ञात सीरियल किलर जैक द रिपर के रहस्य को सुलझालने का एक शख्स ने दावा किया है. उसका कहना है कि उसे कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जो यह साबित करते हैं कि 130 पहले महिलाओं को बेरहमी से कत्ल करने वाला शख्स कौन था?
जैक द रिपर ने विक्टोरियन लंदन की धुंध भरी गलियों में 130 साल पहले काफी आतंक मचाया था. वह इतिहास का पहला सीरियल किलर माना जाता है, जिसकी पहचान अबतक नहीं हुई. अब इतिहास के एक जानकार ने दावा किया है कि उन्हें आखिरकार कुख्यात हत्यारे की पहचान का सबूत मिल गया है.
डेली स्टार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक शीर्ष इतिहासकार का दावा है कि उन्होंने जैक द रिपर के उस रहस्य को सुलझा लिया है जिसने सदियों से इतिहासकारों और अपराध विशेषज्ञों को हैरान कर रखा था. लेखक रसेल एडवर्ड्स ने ये दावा जैक द रिपर की शिकार कैथरीन एडोवेस के शव के पास मिले एक शॉल के फोरेंसिक परीक्षण के आधार पर किया है. उनका तर्क है कि यह शॉल पोलिश-यहूदी नाई आरोन कोस्मिंस्की का था , जिसके बारे में पहले भी दावा किया गया था कि यही 'जैक द रिपर' हो सकता है. 130 साल पहले लंदन में मचा रखा था आतंक 1800 के शुरुआती दशक में उस सीरियल किलर ने पूर्वी लंदन के व्हाइटचैपल में आतंक मचा रखा था , लेकिन वह कभी पकड़ा नहीं गया और इतिहास के सबसे कुख्यात अनसुलझे मामलों में से एक बन गया. उसकी करतूत ने को लेकर शौकिया जासूसों और सच्ची अपराध कहानी लिखने के शौकीनों ने कई तरह के सिद्धांत दिए.
ऐसे ही विशेषज्ञ रसेल भी है, जिन्होंने जैक द रिपर पर काफी रिसर्च किया है और किताब भी लिखी है. उन्होंने 2007 में शॉल खरीदा था और उस पर पाए गए रक्त और वीर्य के निशानों का फोरेंसिक विश्लेषण करवाया था. रसेल ने कहा कि निस्संदेह, 100% यह वही है।.
जैक द रिपर की एक शिकार की परपोती ने उपलब्ध कराए सबूत रसेल ने पिछले साल 'नेमिंग जैक द रिपर: द डेफिनिटिव रिवील' नामक पुस्तक लिखी थी. इन्होंने ने कोस्मिंस्की के सबसे बड़े भाई की परपोती द्वारा प्रदान किए गए डीएनए का इस्तेमाल करके शॉल का परीक्षण किया. उन्होंने बताया कि हमारे पास जो सबूत हैं, उनके आधार पर हम वास्तव में आरोन कोस्मिंस्की को हत्या स्थल पर मौजूद मान सकते हैं.
उन्होंने कोस्मिंस्की के वंशजों में से एक द्वारा दी गई पारिवारिक तस्वीरों के आधार पर एक विशेषज्ञ द्वारा किए गए चेहरे के पुनर्निर्माण की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की. पोलिश मूल के आप्रवासी कोस्मिंस्की व्हाइटचैपल में नाई बन गए थे और 1919 में अपनी मृत्यु के समय वे सिज़ोफ्रेनिया के इलाज के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती थे.
एक नाई को माना जा रहा जैक द रिपर कहा जाता है कि वह व्हाइटचैपल में हत्याओं के केंद्र में रहता था और पुलिस को उस पर शक था क्योंकि ऐसा माना जाता था कि उसे "महिलाओं से नफरत" थी. विशेषकर देह व्यापार करने वाली महिलाओं से उन्हें काफी नफरत थी. महिलाओं के प्रति कोस्मिंस्की को उसके हिंसक व्यवहार के कारण सुधारगृहों में भर्ती कराया गया था.

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