
सीट बंटवारे में सबसे मुश्किल हालात महाराष्ट्र में, NDA-INDIA दोनों गठबंधनों को क्यों करनी पड़ रही है मशक्कत?
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लोकसभा चुनाव करीब आते ही एनडीए से लेकर इंडिया ब्लॉक तक, सीट बंटवारे का गणित सुलझाने की मुहिम तेज हो गई है. लेकिन महाराष्ट्र का सवाल सबसे मुश्किल साबित हो रहा है. महाराष्ट्र में दोनों गठबंधनों को सीट बंटवारे पर कड़ी मशक्कत क्यों करनी पड़ रही है?
लोकसभा चुनाव करीब आ गए हैं. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया ब्लॉक सीट शेयरिंग का गणित सुलझाने की कवायद में जुटे हैं. दोनों ही गठबंधनों में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सीटों का सवाल सुलझ गया है लेकिन बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक यह अब भी मुश्किल सवाल बना हुआ है. सबसे मुश्किल हालात महाराष्ट्र में हैं जहां एनडीए हो या इंडिया, दोनों में से किसी भी गठबंधन में सीट शेयरिंग का ऐलान अब तक नहीं हो सका है.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों को अपने-अपने गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि दोनों ही गठबंधनों में जितनी पार्टियां हैं, उतनी ही डिमांड है. एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के बीजेपी और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक पर बैठक कर रहे हैं लेकिन अब तक किसी फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन सकी है. डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने यह दावा जरूर किया है कि करीब 80 फीसदी मामले सुलझा लिए गए हैं. लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि सहमति बनेगी कैसे?
बीजेपी का फॉर्मूला शिंदे के लिए मुश्किल
दरअसल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 13 सांसद हैं. रामटेक, यवतमाल-वाशिम और कोल्हापुर समेत छह से सात ऐसी सीटों पर बीजेपी अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है जहां से फिलहाल शिंदे की पार्टी के सांसद हैं. अजित पवार की पार्टी भी मावल और परभणी सीट पर दावेदारी कर रही है. इन सीटों से भी शिंदे की पार्टी के सांसद हैं. सीएम शिंदे पर अपने साथ आए नेताओं का भी दबाव है कि अपनी सीटें न छोड़ें. एक खतरा यह भी है कि अगर शिंदे बीजेपी के 10 से 12 सीट के फॉर्मूले पर सहमत भी हो गए तो कहीं उनकी पार्टी के नेता साथ छोड़कर उद्धव के साथ न चले जाएं.
शायद यही वजह है कि सीएम शिंदे बीजेपी के सामने उन सीटों की डिमांड कर रहे हैं जहां से विपक्षी गठबंधन में शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार मैदान में होंगे. दूसरी तरफ, अजित की पार्टी की रणनीति भी शरद पवार की पार्टी से हेड टू हेड मुकाबले की है. अब मुश्किल यह है कि बीजेपी महाराष्ट्र में अधिक से अधिक सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. ऐसे में अगर विपक्षी गठबंधन में उद्धव ठाकरे और शरद पवार अधिक सीटें लेने में सफल रहते हैं तो एनडीए में शिंदे और अजित की पार्टियों को कैसे एडजस्ट किया जाएगा?
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