
सिर्फ हॉस्पिटल में एडमिट होने पर मिलेगी छुट्टी...कंपनी ने खत्म किया कैजुअल-सीक लीव, पोस्ट वायरल
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एक भारतीय कंपनी ने कर्मचारियों की कैजुअल और सीक लीव को बंद कर दी है. अब सिर्फ 12 दिन की सालाना छुट्टी मिलेगी और बीमारी की छुट्टी तभी मिलेगी जब कर्मचारी अस्पताल में भर्ती हो और उसके डॉक्यूमेंट दे. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर लोग नाराजगी और तंज जता रहे हैं.
हाल ही में एक भारतीय कंपनी की छुट्टी (लीव) नीति को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और नाराजगी देखने को मिली. वजह यह है कि कंपनी ने कर्मचारियों के लिए बीमारी और आकस्मिक छुट्टी (Casual and sick leave policies) को ही खत्म कर दिया है. इस फैसले के बाद इंटरनेट पर लोग सवाल पूछ रहे हैं और तंज कस रहे हैं. एक कंपनी के कर्मचारी ने रेडिट पर दावा किया कि उसकी कंपनी ने अब कैजुअल लीव और सिक लीव बंद कर दी है. कर्मचारी ने इसका सबूत देते हुए स्लैक पर आया एक संदेश साझा किया, जो कंपनी के HR विभाग की ओर से बताया जा रहा है.
सिर्फ हॉस्पिटल में एडमिट होने पर मिलेगी छुट्टी इस नए नियम के अनुसार अब कर्मचारियों को साल भर में सिर्फ 12 दिन की वार्षिक सवेतन छुट्टी मिलेगी. ये छुट्टियां हर महीने 1 दिन के हिसाब से जुड़ेंगी. इन छुट्टियों का इस्तेमाल व्यक्ति अपनी निजी जरूरतों या घूमने-फिरने के लिए कर सकता है. अगर कोई कर्मचारी बीमार पड़ता है, तो उसे छुट्टी तभी मिलेगी जब वह अस्पताल में भर्ती हो. इसके लिए अस्पताल के डॉक्यूमेंट, जैसे एडमिशन या डिस्चार्ज रिपोर्ट देना जरूरी होगा. इस तरह की मेडिकल छुट्टी साल में कुल 6 दिन मिलेगी—3 दिन जनवरी में और 3 दिन जुलाई में. कंपनी का कहना है कि यह फैसला छुट्टी की व्यवस्था को सरल और साफ बनाने के लिए लिया गया है.
सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया इस नीति के सामने आते ही लोग भड़क गए. एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, 'अब तो जीवन के आखिरी दिनों के लिए ‘डेथबेड लीव’ भी होना चाहिए. दूसरे ने कहा कि यह नियम दुकान और प्रतिष्ठान अधिनियम के खिलाफ है और गैरकानूनी हो सकता है. किसी ने लिखा, 'अगर सर्दी-जुकाम हो गया तो अब नौकरी बदलनी पड़ेगी.' एक यूजर ने समझदारी की बात कही कि बीमारी की छुट्टी सिर्फ कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि कंपनी के फायदे के लिए भी होती है, ताकि बीमारी फैल न सके.

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