
सिद्धारमैया और शिवकुमार की लड़ाई कर्नाटक के मठों तक पहुंची, कांग्रेस की बिगड़ न जाए सोशल इंजीनियरिंग?
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कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच अब आरपार की लड़ाई छिड़ गई है. ऐसे में शिवकुमार के पक्ष में वोक्कालिगा समुदाय के मठ उतर गए हैं तो सिद्धारमैया ओबीसी और दलित नेताओं को जरिए सियासी लॉबिंग कर रहे हैं. ऐसे में कहीं कांग्रेस का गेम ना खराब हो जाए?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान कांग्रेस के लिए गले की हड्डी बन गई है. सिद्धारमैया सीएम की कुर्सी बचाए रखने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं तो शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने के लिए सारे घोड़े खोल दिए हैं. इस तरह दोनों तरफ से शह-मात का खेल जारी है.
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की लड़ाई में वोक्कालिगा समाज से जुड़े हुए आदिचुंचनगिरी मठ की भी एंट्री हो गई है. आदिचुंचनगिरी मठ के प्रमुख निर्मलानंद नाथ स्वामी अब खुलकर डीके शिवकुमार के पक्ष में उतर आए हैं और कांग्रेस को अल्टीमेटम दे दिया है. वहीं, सिद्धारमैया के करीबी दलित और ओबीसी नेताओं ने अपनी सियासी लॉबिंग शुरू कर दी है. कर्नाटक में छिड़ी सीएम पद की लड़ाई में कहीं कांग्रेस का समीकरण न बिगड़ जाए?
कर्नाटक में सीएम पद को लेकर खिंची तलवार
कर्नाटक में यह घमासान तब तेज हुआ है जब सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हुए हैं. कहा जा रहा है कि सरकार गठन के दौरान भी सीएम पद को लेकर जारी खींचतान के बाद ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था. बताया जा रहा है कि 2023 में कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जाएगा. इस फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया पहले ढाई साल सीएम रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सत्ता संभालेंगे.
सिद्धारमैया के ढाई साल पूरा हो चुका है और तभी से डीके शिवकुमार खेमे के विधायक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और बार-बार कथित 'गुप्त समझौते' की याद दिला रहे हैं. यही नहीं, डीके शिवकुमार के भी दिल्ली आकर गांधी परिवार से मिलने की बात कही जा रही ह.। वहीं, सिद्धारमैया कह रहे हैं कि मेरी ताकत घटी नहीं, बढ़ी है. उन्होंने कहा कि 'विधायक दिल्ली जाएं, कोई समस्या नहीं. आखिरी फैसला हाईकमान का है। इस भ्रम को खत्म करने के लिए हाईकमान को फैसला करना होगा.'
सिद्धारमैया-शिवकुमार की लड़ाई में मठ की एंट्री

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