
सितंबर महीने की एमसीडी बैठक कल, 2 प्रस्ताव पेश होने से पहले ही बीजेपी और आप में ठनी
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एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह का आरोप है कि स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए उसे पहले शिक्षा समिति में पास होने के बाद स्थाई समिति के पास भी मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तभी वो निगम से पास होकर मान्यता मिल जाती है.
दिल्ली में जी 20 के बाद होने वाली निगम की बैठक में आप और बीजेपी के बीच तनातनी अभी से शुरू हो गई है. 26 सितंबर को होने वाली बैठक हंगामाखेज होगी इसके पीछे वजह आम आदमी पार्टी की तरफ से लाए जा रहे दो प्रस्ताव है जिनका बीजेपी ने पुरजोर विरोध करते हुए कहा है कि इनसे लाल फीता शाही इंस्पेक्टर राज और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा.
दिल्ली नगर निगम का संविधान दिल्ली नगर निगम एक्ट है. एक्ट के अनुच्छेद 39 में शिक्षा समिति और ग्रामीण समिति के बारे में काफी कुछ कहा गया है. एक्ट के मुताबिक दिल्ली की शिक्षा से संबंधित नीतियों का काम शिक्षा समिति के 7 सदस्यों का होता है जिसमे 4 चुने जाते हैं और 3 सदस्य 5 साल के लिए मनोनीत होते हैं. हालांकि 26 सितंबर को होने वाली हाउस की बैठक में ऐसा प्रस्ताव लाया जा रहा है जिसमें शिक्षा समिति की पावर कम होगी वहीं शिक्षा निदेशक की अहमियत बढ़ती जाएगी. विपक्ष में बैठी भाजपा ने इस प्रस्ताव का विरोध कर दिया है. आज तक के पास मौजूद प्रस्ताव की कॉपी साफ कहती है कि शिक्षा समिति और इलाके के पार्षद का हस्तक्षेप पांचवी कक्षा तक गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को मान्यता देने में नहीं होगा.
शिक्षा विभाग के अधिकारी ही पूरी प्रक्रिया में शामिल होंगे. इसलिए शिक्षा निदेशक के पास ज्यादा अधिकार होंगे, उसकी अहमियत बढ़ेगी. पहले शिक्षा और स्थायी समिति की मंजूरी और निरीक्षण के बाद नर्सरी से पांचवी तक के गैर सहायता प्राप्त स्कूलों को मान्यता दी जाती थी. अब प्रक्रिया को और सरल बनाते हुए शिक्षा समिति की शक्तियां इस प्रस्ताव के जरिए कम की जा रही हैं.
नेताओं की अहमियत कम होगी और समितियां छोटी होगीं एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह का आरोप है कि स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए उसे पहले शिक्षा समिति में पास होने के बाद स्थाई समिति के पास भी मंजूरी के लिए भेजा जाता है, तभी वो निगम से पास होकर मान्यता मिल जाती है. जनता से जुड़े हुए सदस्य जो की शिक्षा के क्षेत्र में विशेषज्ञ होते हैं उनकी नियुक्ति होती है और अन्य सदस्य जो पार्षद होते हैं वह शिक्षा समिति में सदस्य होते हैं.
वह जनता और स्कूल की समस्याओं को सुनकर स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के संबंध में अपना सुझाव देते हैं, और उनके सुझाव के आधार पर ही स्कूलों की मान्यता का प्रावधान आगे बढ़ता था, परंतु अब यह कार्य नौकरशाही से जुड़े हुए अफसर द्वारा ही किया जाएगा जो कि लोकतंत्र पर एक बड़ा कुठारघात है. इससे शिक्षा का स्तर गिर जाएगा और नौकरशाही हावी हो जाएगी.
वहीं सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के पार्षद प्रेम चौहान का कहना है कि बीजेपी के शासन में कमेटियों की मीटिंग के बीच स्कूल की मान्यता चाहने वाले महीनों लटके रहते थे, ब्लैकमेलिंग होती थी. अब सीधे एमसीडी के ज़ोन और शिक्षा विभाग में फाइल जाया करेगी. एक चेक लिस्ट होगी जिसे पूरा करने वाले को अधिकारी मान्यता दे दिया करेंगे. हम निगम से करप्शन को खत्म कर सीएम केजरीवाल का शिक्षा मॉडल लागू कर रहे हैं.

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