
सिखों में कैसे होता है अंतिम संस्कार? हिंदू रीति-रिवाजों से कितना है अलग
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देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार रात निधन हो गया. शनिवार सुबह 11.45 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार रात निधन हो गया. शनिवार सुबह 11.45 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार किया जाएगा. पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी. पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार सिख समुदाय के रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा.
दरअसल, भारत में अलग-अलग धर्मों में अंतिम संस्कार का तरीका भी अलग है. जहां मुस्लिम और ईसाई धर्म के लोग मरने वाले को जमीन में दफना देते हैं तो वहीं हिंदू और सिख धर्म में लोगों को जलाया जाता है. हालांकि, सभी धर्मों के रीति-रिवाज जरूर अलग हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि सिख धर्म में किस तरह के रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया जाता है और वह हिंदू धर्म के अंतिम संस्कार से कितने अलग हैं.
सिख धर्म में कैसा होता है अंतिम संस्कार सिख धर्म में जो अंतिम संस्कार का तरीका होता है वह काफी हद तक हिंदू धर्म जैसा ही है. हालांकि, हिंदू धर्म में आमतौर पर महिलाओं को श्मशान घाट जाने की अनुमति नहीं होती है जबकि सिख धर्म में महिलाएं श्मशान में अंतिम संस्कार में शामिल हो सकती हैं.
सिख धर्म में जब भी किसी की मृत्यु हो जाती है तो श्मशान घाट ले जाने से पहले मृतक के शरीर को नहलाया जाता है. इसके बाद सिख धर्म की 5 प्रमुख चीजें जैसे कंघा, कटार, कड़ा, कृपाण और केश को संवारा जाता है. इसके बाद मृतक के जो परिवार, रिश्तेदार या करीबी लोग होते हैं वह वाहेगुरु के जप के साथ अर्थी को श्मशान घाट तक लेकर जाते हैं. इसके बाद मृतक का कोई करीबी ही शव को मुखाग्नि देता है.
सिख धर्म में चिता को जलाने के बाद अगले 10 दिनों तक पारंपरिक रस्म निभाई जाती है. श्मशान से लौटकर सबसे पहले सभी लोग स्नान करते हैं उसके बाद उन्हें शाम के समय भजन और अरदास में शामिल होना होता है. इसके बाद सिखों के प्रमुख ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है.
यह पाठ मृत्यु के अगले 10 दिनों तक किया जाता है. इसके बाद गुरु ग्रंथ साहिब के पाठ में शामिल सभी लोगों में कड़हा प्रसाद का वितरण किया जाता है. प्रसाद बांटने के बाद फिर से भजन-कीतर्न किया जाता है. इस दौरान सभी लोग मृतक की आत्मा की शांति के लिए अरदास करते हैं.

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