
सिंध प्रांत में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ दिखा गुस्सा, पानी 'हड़पने' का लगा आरोप
AajTak
सिंध और पंजाब के बीच जल बंटवारे के विवाद के बढ़ने के साथ ही कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन की खबरें आई हैं, जिसमें पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है. आलोचकों का तर्क है कि इस कदम से क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है.
पिछले दो हफ्ते से पाकिस्तान के दक्षिणी प्रांत सिंध में विवादास्पद चोलिस्तान नहर परियोजना के खिलाफ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो सेना समर्थित ग्रीन पाकिस्तान इनिशिएटिव (जीपीआई) का हिस्सा है. सिंध और पंजाब के बीच जल बंटवारे के विवाद के बढ़ने के साथ ही कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन की खबरें आई हैं, जिसमें पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है.
इस नहर परियोजना का मकसद छह प्रमुख नहरों (सिंधु से पांच और भारत द्वारा नियंत्रित सतलुज से एक) के माध्यम से रेगिस्तानी भूमि की सिंचाई करना है-इससे सिंध में व्यापक आक्रोश फैल गया है, जहां सिंधु नदी पहले से ही सूख रही है. आलोचकों का तर्क है कि इस कदम से क्षेत्र में जल संकट गहरा सकता है.
छह नहरों वाली इस परियोजना (पांच सिंधु नदी से और एक भारतीय नियंत्रित सतलुज से) का वकीलों, नागरिक समाज समूहों और राजनीतिक दलों द्वारा जमकर विरोध किया जा रहा है, जिनका दावा है कि यह निचले तटवर्ती सिंध के अस्तित्व को खतरे में डालती है.
कराची और कंधकोट में हिंसक झड़पें हुईं, जब पुलिस ने सिंधु नदी पर एक विवादास्पद नहर परियोजना के विरोध में सड़कों को अवरुद्ध करने वाले प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप प्रदर्शनकारियों और पुलिस अधिकारियों दोनों को चोटें आईं.
कराची में प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस वैन में आग लगा दी और पथराव किया, जिसके कारण पुलिस को आंसू गैस और लाठियों का प्रयोग करना पड़ा, जबकि कंधकोट में इसी परियोजना के खिलाफ वकीलों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोलीबारी की और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे कई शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी घायल हो गए.
सिंध के गृह मंत्री जियाउल हसन लंजर ने कानून और व्यवस्था को बाधित करने वालों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने के लिए एक समिति का गठन किया गया, जो सिंध की कृषि जीवनरेखा के लिए खतरे का हवाला देते हुए नहर परियोजना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.

ईरान ने 66वें राउंड का हमला शुरू कर दिया है. ईरान ने मिसाइलों के जरिए इजरायल पर 66वें राउंड के हमले किए हैं. इधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बहुत बड़ा दावा किया है .IRGC ने अमेरिकी सेना के एक F-35 लड़ाकू विमान पर हमले का दावा किया है और इसका वीडियो भी जारी किया है. दावे के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमान को काफी नुकसान पहुंचा है. देखें 9 बज गए

ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.






