
लारिजानी: ईरान का फिलॉसफर जनरल जिन्होंने इस जर्मन दार्शनिक पर Phd की!
AajTak
अली लारिजानी पर जर्मन दार्शनिक कांट का गहरा बौद्धिक प्रभाव था. लेकिन राजनीतिक चातुर्य ने उन्हें व्यावहारिक बना दिया. उन्होंने कांट को समझा, लिखा और उनकी व्याख्या की. पर ईरान में उसे लागू करने के दौरान भू-राजनीति की वास्तविकताओं ने उनके फैसलों पर असर डाला. दरअसल वे कांट से प्रभावित एक व्यवहारिक रणनीतिकार अधिक थे.
ईरान का जनमानस अपने वरिष्ठ राजनेता अली लारिजानी की मौत से गमजदा है. लेकिन युद्ध के अंजाम तक पहुंच जाने पहले शोक मनाने की फुर्सत कहां होती है. इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के स्टेट्समैन को अली लारिजानी को अक्सर “फिलॉसफर-जनरल” कहा जाता था. लारिजानी कोई मिलिट्री कमांडर नहीं थे, लेकिन सार्वजनिक जीवन का गहरा अनुभव, पश्चिम दर्शन का अध्ययन और सियासत की जानकारी की वजह से ईरान के रणनीतिक फैसले तय करने में उनकी अहम भूमिका थी.
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव के तौर पर अली लारिजानी युद्ध, कूटनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों को तय करने में केंद्र में रहते थे.
उनका जीवन इस बात का अनोखा संगम रहा कि कैसे कांट जैसे जर्मन दार्शनिक की नैतिकता और तर्कवाद किसी राजनीतिक रणनीतिकार के निर्णयों में प्रकट हो सकती है.
लारिजानी के शैक्षणिक जीवन में जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट का गहरा प्रभाव दिखता है. लारिजानी ने तेहरान विश्वविद्यालय से पश्चिमी दर्शनशास्त्र में पीएचडी की, जिसमें उनकी थीसिस “कांट का गणितीय दर्शन” पर केंद्रित थी. उन्होंने कांट पर तीन किताबें लिखीं जो उनकी बौद्धिक यात्रा का केंद्र बिंदु हैं.
क्या था कांट का दर्शन
जर्मन दार्शनिक कांट ने ज्ञान, नैतिकता और स्वतंत्रता पर क्रांतिकारी विचार दिए. कांट ने कहा कहा कि अच्छाई का आधार "कर्तव्य" है, न कि सुख या फायदा. उन्होंने कहा कि ऐसा काम करो कि तुम्हारा नियम सबके लिए सार्वभौमिक कानून बन सके. उन्होंने कहा कि हर इंसान को साधन नहीं, बल्कि उद्देश्य माना जाना चाहिए यानी दूसरों का इस्तेमाल मत करो, उनकी गरिमा का सम्मान करो. उन्होंने कहा कि नैतिकता तर्क से आती है, न कि धर्म या भावना से.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही मीडिया के सामने सेना भेजने की बात से इनकार किया हो, लेकिन 2,200 मरीन सैनिकों के साथ यूएसएस त्रिपोली युद्धपोत का मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ना कुछ और ही इशारा कर रहा है. ट्रंप का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के तेल मार्ग को ईरान के कब्जे से छुड़ाना और वहां दबे यूरेनियम भंडार को सुरक्षित करना है. अगर ये सेना तैनात होती है, तो यह पिछले दो दशकों में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य कदम होगा.

महायुद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है...लेकिन बम-बारूद-गोले थम ही नहीं रहे ..। कहां तो युद्ध ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने से रोकने के लिए शुरू हुआ...और कहां ये जंग तेल युद्ध बनकर दुनिया को धधका रहा है...। समझ नहीं आ रहा कि ये जंग किसे धुरंधर बना रहा...एक तरफ तबाही है...तो दूसरी तरफ तेल-गैस-हीलियम संकट...जो हर घर...हर परिवार पर असर डाल रहा है..

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल-गैस के ठिकानों पर हमले से तनाव बढ़ गया है. पूरे दुनिया पर ऊर्जा का संकट बढ़ता जा रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल के बाजार में पहले ही उथल-पुथल मची है. अब दोनों ओर से ताजा हमलों से पूरी दुनिया महंगाई के बड़े संकट की ओर बढ़ती जा रही है. देखें लंच ब्रेक.

चाहे हालात शांति के हों या युद्ध जैसे तनावपूर्ण, जिंदगी कभी नहीं रुकती, इसकी मिसाल लेबनान में देखने को मिली. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच यहां दुनिया के अलग-अलग देशों से आए हजारों लोग, जो काम के सिलसिले में लेबनान में रह रहे हैं, उन्होंने इजरायली हमलों और तमाम चुनौतियों के बावजूद ईद-उल-फितर का त्योहार पूरे उत्साह के साथ मनाया. संघर्ष और अनिश्चितता के बीच भी लोगों ने एक-दूसरे के साथ खुशियां साझा कीं.

होर्मुज को लेकर तनातनी जारी है. इस बीच छह देशों ने एक बयान जारी किया है ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और नीदरलैंड्स ने कहा है कि वे हॉर्मुज़ में सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान देने के लिए तैयार हैं. हालांकि, इटली, जर्मनी और फ्रांस ने बाद में स्पष्ट किया कि वे तत्काल किसी सैन्य सहायता की बात नहीं कर रहे हैं. इन देशों ने क्या शर्त रखी है. जानें.

ईरान ने 66वें राउंड का हमला शुरू कर दिया है. ईरान ने मिसाइलों के जरिए इजरायल पर 66वें राउंड के हमले किए हैं. इधर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने एक बहुत बड़ा दावा किया है .IRGC ने अमेरिकी सेना के एक F-35 लड़ाकू विमान पर हमले का दावा किया है और इसका वीडियो भी जारी किया है. दावे के मुताबिक अमेरिकी लड़ाकू विमान को काफी नुकसान पहुंचा है. देखें 9 बज गए

ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.






