
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ऑप्शन तो है, पर इनकी क्षमता है काफी कम
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इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती जंग ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग ठप्प कर दिया है. जहां पहले रोज़ाना 130 से ज्यादा जहाज गुजरते थे, अब वहां गिनती सिर्फ 5 जहाजों तक सिमट गई है. इस रास्ते के बंद होने से भारत समेत पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है, क्योंकि सऊदी और यूएई की वैकल्पिक पाइपलाइनों में इतना दम नहीं कि वे होर्मुज की कमी पूरी कर सकें.
दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' इस वक्त लगभग ठप्प हो चुका है. कभी प्रतिदिन 130 से अधिक जहाजों का आवागमन करने वाला यह मार्ग, अब घटकर प्रतिदिन केवल पांच जहाजों तक सीमित रह गया है. क्योंकि अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है.
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक और समुद्री मार्ग नहीं है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, विश्व के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ईरान और ओमान के बीच स्थित इस संकरे मार्ग से होकर गुजरता है. जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत एशिया के लिए होता है.
वैश्विक एलएनजी व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा, विशेष रूप से कतर और संयुक्त अरब अमीरात से, इसी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. वास्तव में, यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा अवरोध बिंदु है.
क्या कोई विकल्प उपलब्ध हैं?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बचने के कुछ दूसरे रास्ते तो हैं, लेकिन उनमें उतनी क्षमता नहीं है. सऊदी अरब और यूएई के पास ऐसी पाइपलाइनें जरूर हैं जो होर्मुज को बाईपास कर सकती हैं, जैसे कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और हबशान-फुजैराह लाइन. लेकिन हकीकत यही है कि ये रास्ते होर्मुज की कमी पूरी नहीं कर सकते.

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