
ईरान के भीतर ‘एली कोहेन’... खुफिया जंग में कैसे मात खा रहा है तेहरान?
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ईरान ने सोचा था कि वो सिर्फ अपने जज्बे और कुछ मिसाइलों और ड्रोन के भरोसे जंग जीत लेगा. इसी ओवर-कॉन्फिडेंस वो मात खाता जा रहा है, जब उसके एक के बाद एक बड़े नेता ताबूत में बंद होते दिखाई दे रहे हैं. ईरानी जज्बे का मुकाबला इजरायली इंटेलिजेंस यानी दुनिया के सबसे बड़े खुफिया नेटवर्क से है. वो नेटवर्क जो ईरानी नेताओं के बेडरूम तक घुसा हुआ है.
यह दास्तान 1960 के दशक की है, जब एक साधारण सा दिखने वाला ‘कामेल अमीन थाबेत’ नामक कारोबारी सीरिया की सत्ता के गलियारों में इतना रसूख बना लेता है कि उसे देश का उप-रक्षा मंत्री बनाने पर विचार होने लगता है. वह कोई और नहीं, बल्कि इजरायली जासूस एली कोहेन थे. कोहेन ने सीरियाई सेना की चौकियों की जानकारी देने के लिए वहां नीलगिरी के पेड़ लगवाए थे, ताकि इजरायली वायुसेना को पता रहे कि बम कहां गिराने हैं. कोहेन को अंततः फांसी दे दी गई, लेकिन उन्होंने इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के लिए एक ऐसी विरासत छोड़ी, जिसने साबित किया कि दुश्मन के बेडरूम तक पहुंचना ही असली जीत है.
आज, दशकों बाद ईरान की धरती पर जो हो रहा है, वह एली कोहेन की उसी रणनीति का आधुनिक और घातक विस्तार है. ईरान आज यह समझ ही नहीं पा रहा है कि उसके अपने शासन तंत्र के भीतर कितने 'एली कोहेन' छिपे बैठे हैं. मोसाद ने केवल तकनीक से नहीं, बल्कि ईरान के अंदर मौजूद असंतुष्टों और 'स्लीपर सेल्स' के जरिए एक ऐसा जाल बुना है, जिसने ईरान के सुरक्षा कवच को पूरी तरह तार-तार कर दिया है.
इस्माइल हानियेह की हत्या: वह सबक जो ईरान ने नहीं सीखा
जुलाई 2024 में तेहरान के एक अति-सुरक्षित गेस्ट हाउस में हमास नेता इस्माइल हानियेह की हत्या ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था. यह हमला कोई मिसाइल दागकर नहीं किया गया था, बल्कि उस कमरे में महीनों पहले लगाए गए एक IED के जरिए किया गया था.
यह ईरान के लिए सबसे बड़ी चेतावनी थी. इससे यह साफ हो गया था कि मोसाद केवल बाहर से हमला नहीं कर रहा, बल्कि वह ईरान के उन सुरक्षा घेरों के भीतर पहले से मौजूद है जिन्हें अभेद्य माना जाता था. लेकिन ईरान ने इस घटना से कोई ठोस सबक नहीं लिया. वहां की सुरक्षा एजेंसियां बाहरी खतरों को ढूंढती रहीं, जबकि खतरा उनके 'अंदर' पनप रहा था. मोसाद ने यह साबित कर दिया कि वह जब चाहे, जिसे चाहे और जहां चाहे निशाना बना सकता है, चाहे वह तेहरान का सबसे सुरक्षित कोना ही क्यों न हो.
...और युद्ध के पहले ही घंटे में खो दिया खामेनेई और शीर्ष कमान को

जिस ईरान को बर्बाद करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप निकले थे. अब लगता है कि उनका पैर उसी ईरान के 'तेल' पर फिसल गया है. और इसलिए वो एक बार फिर पूरी दुनिया को 'चौंकाने' वाला फैसला ले सकते हैं. और ये फैसला ईरान के तेल की Sale से जुड़ा है. ईरान को पूरी तरह से अलग-थलग करने और हर चीज के लिए 'मोहताज' बनाने की कोशिश करने वाले ट्रंप अब खुद ईरान के तेल से प्रतिबंध हटा सकते हैं. और तेल की Sale करने की अनुमति दे सकते हैं? अब सवाल ये है कि जब ट्रंप खुद ईरान के तेल की बिक्री के लिए तैयार हैं, तो वो ईरान से युद्ध क्यों लड़ रहे हैं? क्या वाकई ईरान ने ट्रंप को ऐसा करने के लिए मजबूर कर दिया है, या ट्रंप अपने ही फैसलों की फांस में फंस चुके हैं?

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

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