
साउथ कोरिया LIVE: मार्शल लॉ का विरोध तेज, कई विपक्षी सांसद हिरासत में, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
AajTak
दक्षिण कोरिया की सेना ने भी कहा है कि ऐसी राजनीतिक सभाओं और संसद को निलंबित कर दिया जाएगा जो
दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून सुक योल ने मंगलवार को देश में "आपातकालीन मार्शल लॉ" लागू करने की घोषणा की, जिसमें उन्होंने "देश विरोधी" और "उत्तर कोरिया समर्थक ताकतों" को नष्ट करने का वादा किया. इस घोषणा के बाद, सेओल में संसद के बाहर हंगामा देखा गया, जहां प्रदर्शनकारी संसद में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया.
कब तक लागू रहेगा मॉर्शल लॉ? दक्षिण कोरिया की सेना ने भी कहा है कि ऐसी राजनीतिक सभाओं और संसद को निलंबित कर दिया जाएगा जो "सामाजिक भ्रम" पैदा कर सकती हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि मार्शल लॉ कब तक लागू रहेगा, लेकिन कानून के अनुसार इसे संसद में बहुमत के वोट से हटाया जा सकता है. वर्तमान में दक्षिण कोरिया की संसद में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है. यून ने उत्तर कोरिया से किसी विशेष खतरे का हवाला नहीं दिया, बल्कि अपने घरेलू राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर ध्यान केंद्रित किया. यह 1980 के बाद से दक्षिण कोरिया में पहली बार है जब मार्शल लॉ लागू किया गया है.
मार्शल लॉ के खिलाफ विरोध मार्शल लॉ के लागू होने के बाद, दक्षिण कोरिया की मुख्य विपक्षी पार्टी, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ने अपने सभी सदस्यों से संसद में इकट्ठा होकर मार्शल लॉ के खिलाफ विरोध करने की अपील की. रॉयटर्स के अनुसार, वर्तमान में विपक्ष के लगभग 70 सदस्य संसद के भीतर थे, जबकि बाकी सदस्य बाहर इकट्ठा हो रहे थे. 2022 में पदभार संभालने के बाद, यून को संसद में अपने सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगातार संघर्ष का सामना करना पड़ा है, जहां विपक्षी दलों का अपनी पीपल पावर पार्टी (PPP) पर बहुमत है.
पीपीपी और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच हालिया विवाद अगले साल के बजट बिल को लेकर हुआ था. यून पर विपक्षी दलों ने उनकी पत्नी और शीर्ष अधिकारियों से जुड़े घोटालों की स्वतंत्र जांच की मांग को नकारने के लिए भी आलोचना की है.

आज सबसे पहले आपको ये बताएंगे कि हाफ सीजफायर' के बाद अमेरिका की बातचीत ईरान के किस Respected Leader से चल रही है. डोनाल्ड ट्रंप बार-बार इस बात का दावा कर रहे हैं. लेकिन आज ईरान ने पूछा है कि वो Respected Leader कौन है. और Respected Leader से बातचीत चल रही है तो पाकिस्तान के जरिये 15 शर्तों का प्रस्ताव क्यों भेजा है. उससे भी बड़ी बात ये है कि ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को कूड़ेदान में फेंकते हुए सुपर पावर अमेरिका को अपनी शर्तें बता दी हैं. और कहा है कि सीजफायर छोड़ो, अब ईरान तभी रुकेगा जब अमेरिका उसकी 5 शर्तें मानेगा. इन शर्तों में ईरान ने कहा कि उसे युद्ध में हुए नुकसान का पूरा हर्जाना मिलना चाहिए. ईरान की टॉप लीडरशिप पर हमले बंद होने चाहिए, सारे प्रतिबंध हटाए जाने चाहिए. ईरान को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का कानूनी अधिकार मिलना चाहिए.

आज विशेष में बात इजरायल की. जहां ईरान के हमलों की इंटेंसिटी बढ़ी हुई है. ईरान लगातार इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन से अटैक कर रहा है. लेकिन इजरायल ने अपना सिस्टम ही ऐसा डेवेलप किया हुआ है कि ईरान के भीषण हमलों के बाद भी इजरायल में इतना नुकसान नहीं हो रहा है. भले ही ईरान के हमलों में इमारतें तबाह हो रही हों, गाड़ियों की क्षति हो रही हो. लेकिन लोगों की जान बची हुई है. इजरायल ने कैसे ईरान के हमलों से बचने की तैयारी की हुई है.

सीजेआई सूर्यकांत एक मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त नाराज हो गए, जब याचिकाकर्ता निखिल कुमार पुनिया के पिता ने CJI के भाई को फोन कर दिया. मामला बौद्ध धर्म अपनाकर अल्पसंख्यक आरक्षण मांगने से जुड़ा है. सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे 'नए तरह का धोखा' बताते हुए जांच के आदेश दे चुका है. सीजेआई ने इसे गंभीर कदाचार मानते हुए अवमानना की चेतावनी दी.










