
सरकार से नहीं संभला एशिया का सबसे बड़ा अभ्यारण्य, प्राइवेट एनजीओ को ठेके पर दिया
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Agar Malwa: अभ्यारण्य में 6 हजार गायों को रखने की क्षमता है और उसमें सिर्फ 3250 गाय ही हैं. इसके बावजूद सैकड़ों की तादात में गोवंश सड़कों पर घूम रहा है. स्टाफ की कमी का रोना रोते हुए अब अभ्यारण्य को निजी हाथों में सौंप दिया गया है.
गौ संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करने वाली मध्य प्रदेश सरकार गोवंश को संभालने में विफल होती दिखाई दे रही है. इसका सबूत आगरा मालवा जिले में दिख रहा है. जहां एशिया का सबसे बड़ा गौ अभ्यारण्य ही सरकार ने प्राइवेट एनजीओ को ठेके पर दे दिया है. इसके लिए अभ्यारण्य में काम करने वाले स्टाफ की कमी का हवाला दिया गया.
प्रदेश की भाजपा सरकार में बना यह एशिया का सबसे बड़ा गौ अभ्यारण्य है. मगर आज भी गायें सड़कों पर हैं. मगर अब नया मामला यह सामने आया है कि स्टाफ की कमी के चलते गौवंश की देखरेख ढंग से नहीं हो पा रही.
इसके चलते प्रदेश की शिवराज सरकार ने फैसला किया है कि अब इस अभ्यारण्य्य को निजी हाथों में दे दिया जाए. हुआ भी यही कि अब इस अभ्यारण्य को राजस्थान के एक एनजीओ के हाथों सौंप दिया गया है. ठेके की यह पूरी प्रक्रिया टेंडर के माध्यम से हुई. 5 संस्थाओं ने अपना प्रजेंटेशन दिया था. जिनमें से एक एनजीओ को अभ्यारण्य ठेके पर दे दिया गया. अभ्यारण्य के अध्यक्ष ने बताया कि एनजीओ को प्रति गाय 50 रुपये दिए जाएंगे.
मप्र गौपालन एवं पशुधन संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वरनंद जी ने बताया, हमारी यह प्रक्रिया 6 महीने से चल रही थी. हमने ऐसे लोगों को आमंत्रित किया था जो अभ्यारण्य्य को संभाल सके. हमारे सामने पांच एनजीओ आए, हमने सबका प्रजेंटेशन करवाया. 3 एनजीओ ठीक लगे, मगर उसमें से एक ने मना कर दिया.
स्वामी ने आगे बताया, दूसरे एनजीओ ने बताया कि हमारे पास स्टाफ नहीं है, इसलिए हम नहीं कर पाएंगे और फिर हमने आखिरी में राजस्थान के एक एनजीओ को संचालन करने के लिए दे दिया गया. 20 रुपये गायों के खाने के लिए और 30 रुपये अन्य व्यवस्था के लिए यानी प्रति गाय कुल 50 रुपये एनजीओ को दिए जाएंगे.
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