
संविधान की समीक्षा करने की ज़रूरत है ताकि इसे वास्तव में ‘संघीय’ बनाया जा सके: स्टालिन
The Wire
द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केरल में एक समारोह को संबोधित करते हुए विपक्षी एकता का आह्वान करते हुए कहा कि कुछ राज्यों में एक साथ होना पर्याप्त नहीं है. हमें सभी राज्यों में एकजुट होना चाहिए और एक अखिल भारतीय ताक़त बनना चाहिए.
तिरुवनंतपुरम: द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार को कहा कि संविधान को वास्तव में संघीय बनाने के लिए इसकी समीक्षा करने की जरूरत है. Amid excessive centralisation of powers by Union BJP Govt, the demand for a review & reappraisal of our constitution in order to make it truly federal becomes more important.
भाजपा का मुकाबला करने के लिए देश भर में विपक्षी एकता की वकालत करते हुए स्टालिन ने कहा, ‘व्यक्तिगत आवाज ज्यादा काम नहीं आती. यह एकजुट आवाज होनी चाहिए. अगर हम केवल कुछ राज्यों में एक साथ हैं तो यह पर्याप्त नहीं है. हमें सभी राज्यों में एकजुट होना चाहिए. हमें एक अखिल भारतीय ताकत होना चाहिए.’ Our lofty goals can be achieved only if the progressive forces stand united & become an All India Force. pic.twitter.com/fWLjQvW39y
संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों पर, भाकपा के केरल राज्य सम्मेलन के सत्र को संबोधित करते हुए, स्टालिन ने दशकों पहले संविधान के अनुच्छेद 356 को लागू करते हुए केंद्र द्वारा क्रमश: केरल और तमिलनाडु में वाम और द्रमुक सरकारों की बर्खास्तगी को याद किया. — M.K.Stalin (@mkstalin) October 1, 2022
स्टालिन ने जोर देकर कहा, ‘संविधान की समीक्षा और पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है. जब तक संविधान को वास्तव में संघीय बनाने के लिए संशोधित नहीं किया जाता है, अर्ध-संघीय वर्तमान स्थिति से, हम रुकेंगे नहीं. हमें अपनी आवाज उठाते रहना चाहिए और अपने लक्ष्य की दिशा में काम करना चाहिए.’

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वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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