
संविधान का मान, आंबेडकर का सम्मान या दलित वोटबैंक पर नजर... संसद से सड़क तक आमने-सामने कांग्रेस और बीजेपी
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देश में 20 करोड़ 13 लाख 78 हजार 86 दलित हैं, जो देश की आबादी का 16.63 फीसदी हैं. देश के 76.4 फीसदी दलित ग्रामीण इलाकों में रहते हैं, जबकि पूरे देश की आबादी के 68.8 फीसदी लोग ग्रामीण इलाकों में रहते हैं. यानी ज्यादातर दलित आबादी गांवों में हैं. देश के 23.6 फीसदी दलित शहरी इलाकों में रहते हैं जबकि पूरे देश की आबादी के 31.2 फीसदी लोग शहरी इलाकों में रहते हैं. क्या इसी वोट को साधने की जुगत में कांग्रेस ने आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर मुद्दा बनाया है?
संविधान को अपनाने के 75 साल के मौके पर देश की संसद में चार दिन चली संविधान पर चर्चा एक ऐसे हंगामे पर आकर खत्म हुई है जहां संविधान की बात कम हुई और आंबेडकर का नाम सभी ने लिया. आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाया गया. सबकुछ आंबेडकर के नाम पर हुआ. वो नाम जो भारत में पिछड़ों को आगे लाने की पहचान है, वो नाम जो प्रतीक है जुल्म के खिलाफ आवाज का, सिद्धांतों का और अब नेताओं के लिए सियासी मौकों का भी, जिनके अपमान का आरोप लगाकर खुद सम्मान का दावा करती संसद चर्चा की जगह दांव देने का अखाड़ा बन गई.
संविधान को स्वीकार करने के 75वें वर्ष के मौके पर संविधान से चलने वाले देश और देश की संसद में संविधान पर होती चर्चा के दौरान आंबेडकर के नाम पर राजनीति का वो अखाड़ा दिखा, जिसने देश को संविधान की सौगात देने वाले आंबेडकर की चिंता को जमीन पर ला दिया. चार दिन जिस संसद में संविधान की कसमें खाई गईं, वहां पांचवें दिन आंबेडकर के नाम पर इस्तीफा मांगने और अपनी राजनीति साधने के दांव-पेंच आ गए.
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एक-दूसरे पर वार-पलटवार कर रहे कांग्रेस-बीजेपी
कांग्रेस ने 17 दिसंबर को रात 9 बजकर 19 मिनट पर अमित शाह के बयान के एक हिस्से को लगाकर वीडियो पोस्ट किया. कांग्रेस ने लिखा कि BJP और RSS के नेताओं के मन में बाबा साहेब आंबेडकर को लेकर बहुत नफरत है. राज्य सभा में अमित शाह के भाषण के एक हिस्से के आधार पर ही आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाकर कांग्रेस ने सुबह हाथ में आंबेडकर की तस्वीर लेकर संसद में प्रदर्शन किया. शाम को अरविंद केजरीवाल भी आंबडेकर के अपमान का मुद्दा उठाकर प्रदर्शन करने निकले.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मनुस्मृति को मानने वालों को आंबेडकर से तकलीफ बेशक होगी. आंबेडकर के अपमान को मुद्दा बनाती विपक्ष के दांव का जवाब देने के लिए छह पोस्ट प्रधानमंत्री ने किए. साफ लिखा कि संसद में गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के आंबेडकर के अपमान करने वाले और एससी-एसटी को नजरअंदाज करने के काले इतिहास को उजागर कर दिया तो अब कांग्रेस नाटकबाजी करने लगी है.

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