
संघ के 100 साल: RSS का आयोजन, सरदार पटेल चीफ गेस्ट और कांग्रेस सरकार ने बैन कर दिया कार्यक्रम
AajTak
बात 1948 की है. नेहरूजी अमृतसर में एक सभा कर रहे थे. मंच पर खड़े नेहरू को दिखा कि स्वयंसेवकों का एक जत्था पथसंचलन करते हुए गुजर रहा है. नेहरूजी संघ के सदस्यों को देखकर उखड़ गए और कहा कि अगर इन लोगों के मार्च ऐसे ही जारी रहे तो मैं भारत की जमीन से RSS को उखाड़ फेंकूंगा. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है उसी घटना का वर्णन.
1947 में नवंबर की पहली या दूसरी तारीख थी. पुणे के पास चिंचवाड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने एक बड़े मार्च और उसके बाद सभा का आयोजन किया. मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे देश के गृहमंत्री सरदार पटेल. लेकिन एक दिन पहले ही बॉम्बे (अब महाराष्ट्र) की सरकार की तरफ से आदेश आता है कि इस सभा पर प्रतिबंध लगाया जाता है, इसलिए इसे रद्द कर दें. 5-7 हजार स्वयंसेवक फिर भी इकट्ठा हुए और पुलिस की अपील के बाद शांति से चले भी गए. उन दिनों वहां कांग्रेस की सरकार थी, और मुख्यमंत्री थे बीजी खेर. इस प्रतिबंध के समर्थन या विरोध में कभी सरदार पटेल या उनके कार्यालय की तरफ से कोई संदेश नहीं आया.
बॉम्बे की सरकार ने प्रतिबंध के पीछे की वजह बताई कि विभाजन के बाद हिंदू-मुस्लिम हालात बेहद तनावपूर्ण हैं और संघ के इस कार्यक्रम के चलते आस पास के इलाकों में स्थिति बिगड़ सकती है. लेकिन बॉम्बे सरकार का दूसरा आदेश जो अगले महीने आया, उससे जाहिर हो गया कि कांग्रेस की सरकारें संघ की बढ़ती हुई ताकत को देखकर परेशान हैं.
‘स्वयंसेवक हो तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी’
कांग्रेस की बॉम्बे सरकार ने 24 दिसम्बर 1947 को आदेश निकाला कि, “सरकारी नौकरियों में संघ के स्वयंसेवकों को नौकरियां नहीं दी जाएंगी”. ये आदेश संघ के लिए हैरान कर देने वाला था, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि आजाद भारत में उनको अपनी ही सरकारें इस तरह खत्म करने का काम करेंगी. सबको अंदाजा था कि स्वयंसेवकों को सरकारी नौकरियों से वंचित किया तो कोई मां अपने बच्चों को संघ की शाखा में नहीं आने देगी.
आजादी के आंदोलन में श्यामजी कृष्ण वर्मा ने केवल उन लड़कों को लंदन की फैलोशिप दी थी, जिन्होंने ये लिखकर दिया था कि वो डिग्री लेने के बाद अंग्रेजों की नौकरी नहीं करेंगे, सावरकर भी उनमें शामिल थे.
लेकिन यहां उलट हो रहा था, भारतीयों की सरकार ही नौजवानों को नौकरियां देने से मना कर रही थी. जब चिंचवाड़ के कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगा तो संघ ने उस प्रतिबंध को तोड़ने की कोशिश नहीं की. हां, विरोध में गुरु गोलवलकर की सभा महाराष्ट्र के 13 अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कर दी. किसी भी सभा में गोलवलकर ने प्रतिबंध को लेकर एक शब्द तक नहीं कहा. नवंबर 1947 में ही दिल्ली में मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में संघ पर सख्ती बरतने का फैसला लिया गया. उसमें बॉम्बे की सरकार द्वारा सरकारी नौकरियों पर प्रतिबंध बड़ा फैसला था. पंजाब में गांधी हत्या से 6 दिन पहले लगा प्रतिबंध

पिछले 18 दिनों से अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध का मोर्चा खुला हुआ है. और उधर पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ जंग का एक और फ्रंट खोल दिया है. बीती रात पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक करके एक अस्पताल के 400 मरीज मार डाले. पाकिस्तान को ये लग रहा है कि जब दुनिया का ध्यान ईरान पर है तो वो अफगानिस्तान में कत्लेआम मचा सकता है. और वो इससे बच जाएगा. लेकिन ऐसा होगा नहीं. क्योंकि अब तालिबान ने भी अपने निर्दोष नागरिकों की हत्या का बदला लेना की कसम खा ली है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने ईरान के अली लारिजानी और बसीज कमांडर को मार गिराया है. उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की व्यवस्था को कमजोर करना है. नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मिलकर सैन्य सहयोग जारी है और आगे भी कई बड़ी योजनाएं तैयार हैं.

आज ममता ने ऐलान किया कि, वो नंदीग्राम से नहीं बल्कि भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी. यानी एक बार फिर ममता vs शुभेंदु का राउंड 2 देखने को मिलेगा. इधर, ममता बनर्जी बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले को लेकर लेकर बेहद खफा हैं. पहले उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को चिट्ठी लिखकर तबादलों को चुनाव से प्रेरित बताया और आज तो सीधे सीधे चुनाव आयोग को बीजेपी आयोग करार दे दिया. ममता और टीएमसी लगाकर दावा कर रहीं हैं कि, बीजेपी चुनाव जीतने के लिए चुनाव आयोग का सहारा ले रही है. जबकि, बीजेपी इसे ममता की हताशा बता रही है.

बिहार 5 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने बंपर जीत हासिल की है. एनडीए ने राज्यसभा की पांचों सीटों पर जीत हासिल करके महागठबंधन को एक और बड़ा झटका दिया है. बिहार से राज्यसभा के लिए 5 सीटों पर चुनाव हुए जिसमें बिहार के सीएम नीतीश कुमार, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा ने जीत दर्ज की है.

'ईरान से कोई खतरा नहीं था, मैं जंग के खिलाफ...', सीनियर ऑफिसर ने चिट्ठी लिखकर ट्रंप को भेजा इस्तीफा!
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले पर यूं तो सवाल उठ रहे थे. लेकिन इसका मुखर विरोध पहली बार हुआ है. अमेरिका के काउंटर टेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर ने ट्रंप की नीतियों पर तीखी टिप्पणी की है और कहा है कि ईरान से अमेरिका को फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं था.

IRAN-USA-ISRAEL War की वजह से देश में रसोई गैस सिलेंडर की कमी की खबरें देश भर से आ रही हैं. गैस की किल्लत को लेकर आज भोपाल और लखनऊ में प्रदर्शन भी हुए. मुंबई में लोगों के लिए खाने पीने की चीजें महंगी हो गई हैं. इन खबरों के बीच एक अच्छी खबर आ रही है कि गैस टैंकर से भरे दो जहाज आज भारत पहुंचे। देखें वीडियो.







