
'शापित कविता, जिसने पढ़ी, वो मर गया...', उस जापानी Poem में ऐसा क्या था?
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फर्स्ट वर्ल्ड वार के अंत के तुरंत बाद लिखी गई एक एंटी वार कविता टॉमिनोज़ हेल को बार में माना जाता है कि जो भी इसे पढ़ता है वह किसी न किसी कारण से मर ही जाता है. हालांकि इस दावे में कितनी सच्चाई है ये नहीं कहा जा सकता.
दुनिया में कई चीजों को हमेशा शापित कहा गया है. इसमें एक खास गुड़िया से लेकर शापित पेंटिंग जैसी चीजें देखी गईं. इन चीजों को रखने वाले के साथ बड़ी घटनाएं या मौत तक की खबरें आईं जिसके बाद इन्हें शापित करार दिया गया. लेकिन क्या आपने किसी शापित कविता के बारे में सुना है? दरअसल, फर्स्ट वर्ल्ड वार के अंत के तुरंत बाद लिखी गई एक एंटी वार कविता टॉमिनोज़ हेल को बार में भी कुछ ऐसा ही कहा जाता है. माना जाता है कि जो भी इसे पढ़ता है वह किसी न किसी कारण से मर ही जाता है.
'कविता पढ़ने पर हादसे'
जंपर्स जंप के पॉडकास्टर गेविन रूटा और कार्लोस जुइको ने बताया कि 'इस कविता को पढ़ने के चलते इतने सारे हादसे हुए हैं कि लोग मानने लगे हैं कि इसे पढ़ने की कोशिश करने वाले मर ही जाते हैं. उन्होंने दावा किया कि 1974 की फिल्म पास्टरल, टू डाई इन द कंट्रीसाइड के निर्देशक तेरायामा शुजी की फिल्म रिलीज के एक हफ्ते बाद ही मृत्यु हो गई. सिनेमाघरों में हिट हुई ये फिल्म टॉमिनो हेल पर आधारित थी.
गेविन ने कहा- 'इसी तरह एक कॉलेज की लड़की को उसके दोस्तों ने चैलेंज किया था और कहा था कि तुम इस कविता को ज़ोर से सुनाओ. उसने ये कर दिखाया लेकिन इसके एक हफ्ते बाद उसकी मृत्यु हो गई.
'कविता जोर से पढ़ी तो दुर्भाग्य से नहीं बच पाओगे'
कविता किसी तरह से खतरनाक थी. एक जापानी लेखक और कवि यामोता इनुहिको ने अपनी 2004 की किताब "कोकोरो वा कोरोगारू इशी नो यू नी" (द हार्ट इज लाइक ए रोलिंग स्टोन) में इसको लेकर लिखा था कि- "अगर आपने टोमिनोज़ हेल कविता ज़ोर से पढ़ी, तो आप एक भयानक दुर्भाग्य से नहीं बच पाएंगे.

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