
'वोटर-फ्रेंडली है बिहार का SIR...' सुप्रीम कोर्ट ने कहा, विरोध में अभिषेक सिंघवी ने दीं ये दलीलें
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सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision प्रक्रिया पर सुनवाई में पहचान पत्रों की संख्या बढ़ाने, नागरिकता प्रमाण, और दस्तावेजों के सोर्स की विश्वसनीयता पर बहस हुई. कोर्ट ने आंकड़ों की स्पष्टता मांगी और कहा कि एसआईआर तो वोटर-फ्रेंडली है, जबकि याचिकाकर्ता ने दो महीने में प्रक्रिया पूरी करने के मामले पर सवाल उठाया और इसे एक साल में करने का सुझाव दिया.
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को बिहार में चुनाव आयोग (ECI) द्वारा किए जा रहे Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है. यह सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने हो रही है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि हम समझ रहे हैं कि आप आधार के बारे में बात कर रहे हैं... पहचान पत्रों की संख्या बढ़ाना वोटर-फ्रेंडली कदम है, और यह बाहर किया जाने वाला यानी एक्सक्लूजनरी कदम नहीं है. उन्होंने कहा कि पहले 7 दस्तावेज मान्य थे, अब 11 हैं, जिससे लोगों के पास और विकल्प होंगे.
मामले की सुनवाई में शामिल जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "अगर कोई कहता है कि सभी 11 दस्तावेज जरूरी हैं, तो यह एंटी-वोटर होगा, लेकिन अगर कहा जाता है कि 11 विश्वसनीय दस्तावेजों में से कोई भी दें...?" जजों की टिप्पणियों के बाद याचिकाकर्ताओं के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जस्टिस बागची की टिप्पणी पर कहा कि वह उनसे असहमत हैं और बताया कि असल में यह एक्सक्लूजनरी है.
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सिंघवी ने कहा, "(1) आधार शामिल नहीं है - यह एक्सक्लूजनरी है. यह वह दस्तावेज है जिसका कवरेज सबसे अधिक है. (2) पानी, बिजली, गैस कनेक्शन - इसमें (मांगे गए डॉक्यूमेंट्स में) शामिल नहीं हैं (3) इंडियन पासपोर्ट - 1-2% से कम कवरेज है. संख्या के संदर्भ में, वे प्रभावित करने के लिए इसे बरकरार रख रहे हैं. लेकिन स्वभाव से, यह न्यूनतम कवरेज वाला दस्तावेज है. (4) अन्य सभी दस्तावेजों का कवरेज 0-2-3% के बीच है. अगर किसी के पास जमीन नहीं है, तो दस्तावेज 5,6,7 बाहर हैं. मुझे आश्चर्य है कि बिहार में कितने लोग इसके लिए योग्य होंगे? बिहार में निवास प्रमाण पत्र मौजूद नहीं है. फॉर्म 6 में केवल सेल्फ-डिक्लेरेशन की जरूरत होती है."
अभिषेक मनु सिंघवी ने इस बात पर इसपर आपत्ति क्यों है? वकील अभिषेक सिंघवी ने कहा, "कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन चुनाव से महीनों पहले क्यों? बाद में करवािए, पूरा साल लग जाएगा. चुनाव आयोग 11 दस्तावेजों का हवाला देकर प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है... 3 दस्तावेजों के सोर्स उन्हें नहीं पता, बाकी 2 बेहद संदिग्ध और अप्रासंगिक हैं... ये 11 की लिस्ट ताश के पत्तों की तरह हैं. ये आधार, पानी और बिजली के बिलों की जगह ले लेते हैं.
नागरिकता प्रमाण के मुद्दे पर पूरी तरह 180 डिग्री टर्न लिया- सिंघवी

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