
वहां के हाल क्या हैं... जहां की जमीन से निकली है वो ज्वालामुखी, जिसकी राख दिल्ली तक आई!
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इथियोपिया में लगभग 12,000 वर्षों में पहली बार ज्वालामुखी फटा है. राख के घने गुबार यमन और ओमान से होते हुए पाकिस्तान और उत्तरी भारत में फैल गए हैं. इससे लाल सागर का हवाई यातायात गलियारा बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ऐसे में जानते हैं जहां यह ज्वालामुखी फटा वहां के हालात कैसे हैं.
अफ्रीका के इथियोपिया के अफार क्षेत्र में इरिट्रिया सीमा के पास अदीस अबाबा से लगभग 500 मील उत्तर-पूर्व में स्थित हेयली गुब्बी ज्वालामुखी रविवार को कई घंटों तक फटता रहा. इस ज्वालामुखी की ऊंचाई लगभग 500 मीटर है. यह रिफ्ट घाटी के भीतर स्थित है, जो तीव्र भूगर्भीय गतिविधि वाला क्षेत्र है, जहां दो टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं.
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद वायुमंडल में 14 किमी (9 मील) तक राख फैल गई. हेयली गुब्बी ज्वालामुखी के विस्फोट से निकली राख वायुमंडल में इतनी तेजी से फैली कि यमन और ओमान होते हुए यह भारत की ओर बढ़ने लगी.
कैसा है वो इलाका जहां हुआ ज्वालामुखी विस्फोट अफार क्षेत्र को भूकंप-प्रवण क्षेत्र माना जाता है. जहां यह ज्वालामुखी फटा, वो रेगिस्तानी इलाका है और आसपास छोटे-छोटे गांव बसे हुए हैं. इस वजह से रेगिस्तान में बसे आसपास के छोटे-छोटे गांव राख से ढंक गए और जान-माल का नुकसान कम हुआ. आसपास के गांवों में रहने वाले लोग पशुपालन पर निर्भर हैं.
जहां ज्वालामुखी फटा, कैसे हैं वहां के हालात द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अफार क्षेत्रीय अधिकारी मोहम्मद सईद ने बताया कि ज्वालामुखी विस्फोट से कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन विस्फोट के कारण आस-पास के दर्जनों गांव राख से ढक गए हैं. किसी व्यक्ति या मवेशी की मौत नहीं हुई है. राख से कई गांव ढक गए हैं. इस वजह से उनके जानवरों के पास खाने के लिए चारे की कमी हो गई है.
तेज आवाज के साथ हिल गई थी धरती वहां के निवासियों ने बताया कि उन्होंने एक जोरदार विस्फोट की आवाज सुनी थी. अफार क्षेत्र के निवासी अहमद अब्देला ने कहा कि ऐसा लगा जैसे अचानक कोई बम फेंका गया हो, जिससे धुआं और राख फैल गई हो. उन्होंने एक तेज कंपन और शॉक वेव महसूस किया. अब्देला ने बताया कि अचानक से धरती हिल गई थी. अफार क्षेत्र में राख से घर ढक गए थे और दानाकिल रेगिस्तान की ओर जाने वाले यात्री फंस गए थे.
पहले इस ज्वालामुखी विस्फोट के नहीं हैं रिकॉर्ड स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के वैश्विक ज्वालामुखी कार्यक्रम का कहना है कि होलोसीन (लगभग 12,000 साल पहले शुरू हुआ भूवैज्ञानिक काल) के दौरान हेली गुब्बी के फटने का कोई ज्ञात रिकॉर्ड नहीं है. मिशिगन टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के ज्वालामुखी विज्ञानी साइमन कार्न ने ब्लूस्काई पर कहा कि ज्वालामुखी का होलोसीन विस्फोटों का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

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