
वर्ल्ड एलर्जी संगठन ने दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल को दिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का खिताब
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सर गंगा राम हॉस्पिटल एलर्जी के इलाज और रिचर्स के लिए विश्व एलर्जी संगठन ने सम्मानित किया है. यह हास्पिटल एलर्जी को जड़ से खत्म करने की ओर काम कर रहा है. जानिए- वो खासियतें जिनके कारण मिला ये सम्मान.
देश में एलर्जिक डिसऑर्डर बढ़ते जा रहे हैं. हर दूसरा व्यक्ति किसी ना किसी एलर्जी का शिकार है, इनमें सबसे आम है जुकाम, कफ, कोल्ड, छाती में दर्द, त्वचा में रूखापन या खुजली वाली त्वचा, गैस की वजह से पेट खराब होना और चकत्ते. रिपोर्ट के मुताबिक वयस्कों से ज्यादा यह बीमारी बच्चों में पाई जा रही है.
बड़ों की तुलना में बच्चों को हो रहीं ज्यादा एलर्जी
अपनी बढ़ी हुई प्रतिरक्षात्मक प्रतिक्रियाओं और अविकसित डिटॉक्स के कारण बच्चे वयस्कों की तुलना में अधिक प्रभावित होते हैं. इसका कारण आजकल की बदलती लाइफस्टाइल, खानपान, ब्रेस्ट फ्रीडिंग ड्यूरेशन कम होना, घर से बाहर आउटडोर एक्टिविटी में भाग ना लेना, एंटीबायोटिक्स का लगातार इस्तेमाल करना आदि, इन सभी चीजों से एलर्जी का खतरा बढ़ा जाता है. वातावरण में प्रदूषण और बढ़ते शहरीकरण के कारण स्थिति और खराब हो गई है. इसके अलावा यह भी देखा गया है कि एलर्जी का पीड़ितों और देखभाल करने वालों दोनों के मनो सामाजिक व्यवहार और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
एलर्जी की जड़ का नहीं किया जाता इलाज
इतनी बड़ी समस्या के बावजूद, पूरे देश में गुणवत्तापूर्ण एलर्जी सेवाएं दुर्लभ है. एक विषय के रूप में अभी तक देश के चिकित्सा पाठ्यक्रम में जगह नहीं बना पाई है. समस्या के मूल कारण को छोड़कर, मरीजों को केवल विभिन्न मौजूदा चिकित्सा विशिष्टताओं द्वारा लक्षणात्मक रूप से इलाज किया जा रहा है. दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के बाल एलर्जी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार और एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता ने एलर्जी उपचार के महत्व को लेकर कहा कि विभिन्न एलर्जी लक्षणों से जूझ रहे रोगियों के उचित निदान और प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता है. यदि समय पर उपचार किया जाए तो एलर्जी को जीवनभर के लिए ठीक किया जा सकता है. देश के प्रमुख एलर्जी विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता किसी भी प्रकार की एलर्जी से पीड़ित बच्चों और वयस्कों की जीवन स्थितियों में सुधार के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं.
भारत और पड़ोसी देश के लिए रेफरल बना सर गंगा राम हॉस्पिटल

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