
लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़... जानिए गैंगस्टर्स की ये जोड़ी सलमान खान के पीछे क्यों पड़ गई है? पहले रेकी, अब धमकी
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तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक कुख्यात अपराधी है. जिसके खिलाफ एक नहीं दर्जनों मामले दर्ज हैं. वो जेल में बंद रहकर भी अपना गैंग ऑपरेट करता है. जिसकी कमान संभालते हैं गोल्डी बराड़ और उसका ममेरा भाई सचिन बिश्नोई.
Salman Khan: बॉलीवुड सुपर स्टार सलमान खान को पहले गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और अब गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने धमकी दे डाली. सलमान को धमकी मिलने का ये सिलसिला साल 1998 से चला आ रहा है. ये वही साल था, जब काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान का नाम आया था. अब सवाल उठता है कि आखिर कुख्यात अपराधी लॉरेंस बिश्नोई का इस मामले से क्या लेना-देना है? क्यों वो और उसका गैंग सलमान खान की जान का दुश्मन बना हुआ है? आइए जान लेते हैं, इस दुश्मनी की असल वजह.
कौन है लॉरेंस बिश्नोई? तिहाड़ जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई एक कुख्यात अपराधी है. जिसके खिलाफ एक नहीं सैकड़ों मामले दर्ज हैं. वो जेल में बंद रहकर भी अपना गैंग ऑपरेट करता है. जिसकी कमान संभालते हैं गोल्डी बराड़ और उसका ममेरा भाई सचिन बिश्नोई. ये दोनों कनाडा में बैठकर गैंग को चलाते हैं. इनके अलावा ऑस्ट्रीया में अनमोल और कनाडा में रहकर विक्रम बराड़ तमाम लेन-देन के मामलों को संभालता है. पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस के इस क्राइम नेटवर्क में करीब एक हजार लोग जुड़े हैं, जिसमें शार्प शूटर्स, केरीयर, सप्लायर, रैकी पर्सन, लॉजिस्टिक स्पोट बॉय, शेल्टर मेन और सोशल मीडिया विंग के सदस्य शामिल हैं. लॉरेंस इस गैंग का मास्टरमाइंड है तो गोल्डी बराड़ को इस गैंग में रीढ़ की हड्डी माना जाता है. पिछले साल पंजाबी गायक और कांग्रेस नेता सिद्धू मूसेवाला की हत्या के पीछे भी गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का नाम आया था.
काला हिरण और बिश्नोई समाज का कनेक्शन गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का संबंध बिश्नोई समाज है. जो मूलतः जोधपुर के पास पश्चिमी थार रेगिस्तान से ताल्लुक रखता है. यह समाज प्रकृति के प्रति प्रेम के लिए जाना जाता है. बिश्नोई समाज में जानवर को भगवान तुल्य मान जाता है और खासकर हिरण. इसी लिए इस समाज के लोग हिरण और अन्य पशुओं के लिए अपनी जान की बाजी लगाने से भी पीछे नहीं हटते हैं. वे काला हिरण की पूजा करते हैं. दरअसल, ये लोग हिरण को भगवान की तरह मानते हैं और इसका संरक्षण करते हैं. राजस्थान के कुछ गांवों में आज भी महिलाएं हिरण के बच्चों को अपना दूध पिलाती हैं. कुछ साल पहले एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें एक महिला हिरण के बच्चे को अपना दूध पिला रही थी.
ऐसे लोगों को मिलता है शहीद का दर्जा बिश्नोई समाज में प्रकृति के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देता है. बता दें कि इस समाज के कई ऐसे लोग भी हुए हैं, जिन्होंने जानवरों के लिए अपनी जान भी गंवाई है, उसमें गंगा राम विश्नोई जैसे कई नाम शामिल है. कुछ वर्षों पहले बिश्नोई समाज का एक युवक निहालचंद वन्यजीवों की रक्षा की कोशिश में शिकारियों से लड़ते हुए अपनी जान पर खेल गया था. बाद में इस घटना पर ‘विलिंग टू सैक्रीफाइस’ फिल्म भी बनी थी.
बिश्नोई समाज के अहम नियम दरअसल बिश्नोई बीस (20) और नोई (9) से मिलकर बना है और यह समाज 29 नियमों का पालन करता है. इन नियमों में एक नियम शाकाहारी रहना और हरे पेड़ नहीं काटना भी शामिल है. साथ ही ये लोग जम्भोजी को पूजते हैं. बिश्नोई समाज के लोग लगभग 550 साल से प्रकृति की पूजा करते आ रहे हैं. काला हिरण विलुप्त होती प्रजाति है जिसकी सुरक्षा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत की जाती है.
प्रकृति के रक्षा के लिए दे सकते हैं जान वहीं चिपको आंदोलन में भी विश्नोई समाज का अहम योगदान है. बिश्नोई समाज आमतौर पर पर्यावरण की पूजा करने वाला समुदाय माना जाता है. ये बिश्नोई समाज ही था जिसने पेड़ों को बचाने के लिए अपने जान की आहुती दी थी. जोधपुर के राजा द्वारा पेड़ों के काटने के फैसले के बाद एक बड़े पैमाने पर बिश्नोई समाज की महिलाएं पेड़ो से चिपक गई थी और उन्हें काटने नहीं दिया. इसी के तहत पेड़ों को बचाने के 363 बिश्नोई समाज के लोगों के अपनी जान भी दे दी थी.

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