
लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह को मिला मिलिट्री के टॉप डॉक्टर का पद
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सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज, पुणे के पूर्व छात्र, दलजीत सिंह को दिसंबर 1983 में AFMS में नियुक्त किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी से बाल रोग में मास्टर्स डिग्री और PGIMER चंडीगढ़ से नियोनेटोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है.
लेफ्टिनेंट जनरल दलजीत सिंह ने बुधवार को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (DGAFMS) के महानिदेशक के रूप में कार्यभार संभाला है. वह अब भारत के सबसे वरिष्ठ मिलिट्री डॉक्टर हैं. शीर्ष पद पर पदोन्नत होने से पहले, जनरल सिंह महानिदेशक चिकित्सा सेवा (सेना) के तौर पर कार्यरत थे.
सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज, पुणे के पूर्व छात्र, दलजीत सिंह को दिसंबर 1983 में AFMS में नियुक्त किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पुणे यूनिवर्सिटी से बाल रोग में मास्टर्स डिग्री और PGIMER चंडीगढ़ से नियोनेटोलॉजी में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है.
उन्होंने बतौर प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ और नियोनेटोलॉजिस्ट अपने 38 वर्षों के करियर के दौरान कई पेशेवर नियुक्तियां की हैं. जनरल ऑफिसर ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक और स्टाफ नियुक्तियां की हैं जिसमें से 7 वायु सेना अस्पताल कानपुर की कमान संभाल रहे हैं. इनमें मुख्यालय मध्य वायु कमान इलाहाबाद में प्रधान चिकित्सा अधिकारी, हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ नई में असिस्टें चीफ और एयर हेडक्वार्टर नई दिल्ली में एयर स्टाफ (मेडिकल) असिस्टेंट चीफ शामिल हैं.
उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए, उन्हें 2006 में चीफ ऑफ द एयर स्टाफ कमेंडेशन, 2011 में चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमेंडेशन, सशस्त्र बलों के लिए उनकी उत्कृष्ट और मेधावी सेवाओं के लिए 2020 में विशिष्ट सेवा मेडल (वीएसएम) और 2023 में असाधारण क्रम की उनकी विशिष्ट सेवा के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया गया. उन्हें 01 नवंबर 2021 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा मानद सर्जन (PHS) से सम्मानित किया गया है. जनरल ऑफिसर द आर्मी मेडिकल कोर के वरिष्ठ कर्नल कमांडेंट भी हैं. उन्होंने डॉ (श्रीमती) अंजना राणा से शादी की थी और दो बेटियां- बड़ी एक पवित्रा सांगवान और छोटी तनमय सांगवान हैं.

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