
लड़कियों पर मुकेश खन्ना की टिप्पणी से विवाद, डीसीडब्ल्यू ने एफ़आईआर दर्ज किए जाने की मांग की
The Wire
दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक ‘महाभारत’ में भीष्म पितामह और ‘शक्तिमान’ में मुख्य भूमिका निभाने के लिए जाने जाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना ने कहा है कि ‘सभ्य समाज’ की लड़की यौन संबंधों को लेकर कभी कोई बात शुरू नहीं करेगी और अगर वो ऐसा करती है तो यौनकर्मी है.
बीआर चोपड़ा के धारावाहिक ‘महाभारत’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभाने और ‘शक्तिमान’ में अभिनय के लिए जाने जाने वाले खन्ना ने कहा कि ‘सभ्य समाज’ की लड़की यौन संबंधों को लेकर कभी कोई बात शुरू नहीं करेगी. DCW Chairperson @SwatiJaiHind issues notice to Delhi Police cyber cell seeking registration of an FIR against Shaktimaan fame actor Mukesh Khanna for his derogatory and misogynistic comments against women. pic.twitter.com/8nAbOGXiZE शक्तिमान सिर्फ हवा में उड़के नहीं बल्कि महिलाओं का सम्मान करने से बनते हैं। इस तरह लड़कियों को "धंधे वाली" बोलना मुकेश खन्ना की घटिया सोच दर्शाता है। इनका शो देखकर शैतान बच्चे बोलते थे #SorryShaktiman। आज अपने बयान के लिए इन्हें पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। pic.twitter.com/2VhBMMBEQ9
64 वर्षीय अभिनेता ने अपने ‘यूट्यूब’ चैनल ‘भीष्म इंटरनेशनल’ पर बीते आठ अगस्त को पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा था, ‘यदि कोई लड़की किसी लड़के से यौन संबंध बनाने के लिए कहती है, तो वह कोई लड़की नहीं है, क्योंकि वो ‘धंधा’ कर रही है, क्योंकि किसी सभ्य समाज की कोई शालीन लड़की ऐसी बात कभी नहीं करेगी. अगर वो ऐसी बात करती है तो वो सभ्य समाज की नहीं है, ये उसका ‘धंधा’ है. आप उसमें भागीदार मत बनिए.’ — Delhi Commission for Women – DCW (@DCWDelhi) August 10, 2022 — Swati Maliwal (@SwatiJaiHind) August 10, 2022
इस बयान को लेकर विवाद छिड़ने के बाद खन्ना ने कहा कि वह महिला-पुरुष के आम संबंधों पर टिप्पणी नहीं कर रहे थे और उनका मकसद ‘युवाओं को देह व्यापार से जुड़े गिरोहों को लेकर जागरूक’ करना था.
खन्ना ‘क्या आपको कभी ऐसी लड़कियां लुभाती हैं?’ शीर्षक वाले वीडियो में देह व्यापार से जुड़े उन गिरोहों की बात कर रहे थे, जो पुरुषों को ब्लैकमेल करते हैं.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.

मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?



