
लखनऊ विश्वविद्यालय में मोहन भागवत के कार्यक्रम का हुआ विरोध, सुरक्षा बंदोबस्त से छात्रों को चार घंटे तक परेशानी
The Wire
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय दौरे के दौरान कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के कारण छात्रों को घंटों परिसर में प्रवेश नहीं मिला. कार्यक्रम के विरोध में छात्र संगठनों ने नारेबाज़ी की और प्रशासन पर वैचारिक पक्षपात के आरोप लगाए.
लखनऊ: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के लखनऊ विश्वविद्यालय दौरे के दौरान बुधवार (17 फरवरी) को परिसर में विरोध प्रदर्शन और कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के कारण छात्रों को करीब चार घंटे तक भारी असुविधा का सामना करना पड़ा. कई छात्र अपने विभागों तक नहीं पहुंच सके और कैशियर कार्यालय से डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और नामांकन फार्म लेने से वंचित रह गए.
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार और गेट नंबर-2, जो अधिकांश मानविकी विभागों की ओर जाता है, को बंद कर दिया गया था. कैनिंग कॉलेज भवन और मुख्य भवन तक जाने वाले रास्तों को भी सुरक्षा कारणों से अवरुद्ध कर दिया गया था. मालवीय हॉल में आयोजित ‘आरएसएस रिसर्च स्कॉलर्स डायलॉग’ कार्यक्रम के मद्देनज़र भारी पुलिस बल तैनात किया गया था.
प्राचीन भारतीय इतिहास एवं पुरातत्व, हिंदी, राजनीति विज्ञान, पाश्चात्य इतिहास और शिक्षा विभाग के छात्र सुरक्षा बैरिकेड्स के पास खड़े रहे. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बीए की छात्रा अनामिका जायसवाल ने बताया कि वह सुबह करीब 9:30 बजे नामांकन फार्म लेने आई थीं, लेकिन गेट नंबर-1 और 2 से प्रवेश नहीं दिया गया. उन्होंने कहा, ‘दोपहर 12 बजे के बाद ही हमें अंदर जाने की अनुमति मिली.’
कार्यक्रम का विरोध क्यों?
इसी दौरान समाजवादी छात्र सभा और कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम का विरोध किया. करीब 25 छात्र-छात्राओं ने परिसर में ‘मोहन भागवत गो बैक’ और ‘आरएसएस मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने भागवत को ‘भारतीय समाज में नफरत का प्रतीक’ बताया और आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विपक्षी छात्र संगठनों को अकादमिक कार्यक्रमों के लिए हॉल उपलब्ध नहीं कराता, जबकि सत्तारूढ़ विचारधारा से जुड़े कार्यक्रमों को अनुमति देता है.
छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय करदाताओं के पैसे से चलता है और इसे किसी निजी वैचारिक मंच के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग कर कुछ छात्रों को हिरासत में लिया, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया.

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