
रूसी वैज्ञानिकों का कमाल, पानी के अंदर तैनात किया 'स्पेस टेलिस्कोप', खोजेगा धरती का सबसे छोटा कण
AajTak
आपने सुना होगा कि अंतरिक्ष की निगरानी के लिए दुनिया भर में कई तरह के टेलिस्कोप लगे हैं. बड़े और अद्भुत ताकतवर. ये टेलिस्कोप स्पेस यानी अंतरिक्ष की निगरानी करते हैं. लेकिन रूस के वैज्ञानिकों ने पहली बार पानी के अंदर ऐसा टेलिस्कोप लगाया है तो जो इनर स्पेस यानी धरती के अंदर और आउटर स्पेस यानी अंतरिक्ष दोनों पर नजर रखेगा. ये उन कणों की खोज करेगा जिनकी वजह से धरती का निर्माण हुआ था. यानी दुनिया के सबसे छोटे कण न्यूट्रीनोस. अगर इन कणों की गतिविधि बढ़ जाए तो काफी नुकसान हो सकता है. इसलिए इनकी निगरानी जरूरी है.
आपने सुना होगा कि अंतरिक्ष की निगरानी के लिए दुनिया भर में कई तरह के टेलिस्कोप लगे हैं. बड़े और अद्भुत ताकतवर. ये टेलिस्कोप स्पेस यानी अंतरिक्ष की निगरानी करते हैं. लेकिन रूस के वैज्ञानिकों ने पहली बार पानी के अंदर ऐसा टेलिस्कोप लगाया है तो जो इनर स्पेस यानी धरती के अंदर और आउटर स्पेस यानी अंतरिक्ष दोनों पर नजर रखेगा. ये उन कणों की खोज करेगा जिनकी वजह से धरती का निर्माण हुआ था. यानी दुनिया के सबसे छोटे कण न्यूट्रीनोस. अगर इन कणों की गतिविधि बढ़ जाए तो काफी नुकसान हो सकता है. इसलिए इनकी निगरानी जरूरी है. (फोटोःगेटी) रूस के वैज्ञानिकों ने हाल ही में बैकल झील (Lake Baikal) के अंदर एक बड़ा स्पेस टेलिस्कोप लगाया है. इस टेलिस्कोप को साल 2015 से बनाया जा रहा था. इसका काम है न्यूट्रीनोस (Neutrinos) का पता लगाना. न्यूट्रीनोस दुनिया के सबसे छोटे कण होते हैं. इनकी निगरानी करना या इनकी मात्रा जानना बेहद कठिन है. इसलिए यह टेलिस्कोप लगाया जा रहा है. (फोटोःगेटी) वैज्ञानिकों ने इस टेलिस्कोप को बैकल-जीवीडी (Baikal-GVD) नाम दिया है. इसे बैकल झील में 750 से 1350 मीटर यानी 2500 से 4300 फीट नीचे पानी में तैनात किया गया है. यह झील के किनारे से 4 किलोमीटर दूर है. न्यूट्रीनोस (Neutrinos) का पता लगाना अत्यधिक कठिन कार्य है. लेकिन पानी एक ऐसा माध्यम है जिससे इनकी जांच करना आसान हो जाता है. इसलिए टेलिस्कोप पानी के अंदर तैनात किया गया है. (फोटोःगेटी)
सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










