
रिटायर्ड सुरक्षा अधिकारियों को पूर्व संगठन संबंधी लेखन के लिए लेनी होगी सरकार की इजाज़त
The Wire
मोदी सरकार द्वारा सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 में किए गए संशोधन के बाद अब रिटायर्ड सुरक्षा अधिकारियों को अपने पूर्व संगठन से संबंधित विषय पर कुछ भी लिखने से पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी. इसका उल्लंघन सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन को ख़तरे में डाल सकता है.
नई दिल्ली: सेवानिवृत्त सुरक्षा और इंटेलिजेंस अफसरों को वर्तमान नीतियों से संबंधित मसलों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करने से रोकने की कोशिश के तहत नरेंद्र मोदी सरकार ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स, 1972 में एक संशोधन की अधिसूचना जारी करके सेवानिवृत्त अधिकारियों के बगैर पूर्व इजाजत लिए किसी ऐसे विषय पर मीडिया में कोई टिप्पणी करने, कोई चिट्ठी या किताब या कोई दस्तावेज प्रकाशित कराने पर पाबंदी लगा दी है, जो किसी ऐसे संगठन के ‘दायरे’ (डोमेन) में आता है, जिसमें उन्होंने कार्य किया हो. ‘उस संस्थान के कार्यक्षेत्र (डोमेन) में आता हो. इसमें किसी कर्मचारी या उसका पद या उसकी विशेषज्ञता या ज्ञान शामिल है, जो उसे उस संगठन में काम करने के कारण मिला हो.’ ‘मुझे इस बात की जानकारी है कि सेवानिवृत्ति के बाद प्रासंगिक पेंशन नियमों के तहत मुझे दी जाने वाली पेंशन यहां दिए गए वचनों का उल्लंघन करने पर रोकी, या आंशिक तौर पर या पूरी तरह से समाप्त की जा सकती है.’ यह संशोधन नियम 8 में जोड़ा गया है जो कि ‘भविष्य के अच्छे आचरण के आधार पर पेंशन’ से संबंधित है. इसका अर्थ यह है कि इस नए दिशा-निर्देश का कोई भी उल्लंघन सेवानिवृत्त अधिकारी के पेंशन को खतरे में डाल सकता है. पेंशन नियमों में 2008 के संशोधन ने सिर्फ ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (सरकारी गोपनीयता कानून) और सामान्य अपराध कानून के तहत प्रतिबंधों को स्पष्ट करते हुए सेवानिवृत्त अधिकारियों के संवेदनशील सूचनाओं पर लिखने पर, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, रणनीतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों को नुकसानदेह तरीके से प्रभावित करेगा…या किसी अपराध को उकसावा देगा,’ पाबंदी लगा दी थी. अब यह नया नोटिफिकेशन पाबंदियों के दायरे को काफी बढ़ा देने वाला है. कार्मिक, जन-शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय- जिसके मुखिया नरेंद्र मोदी हैं-’ द्वारा 31 मई, 2021 को जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि कोई भी सरकारी अधिकारी, जिसने इंटेलिजेंस या सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (2005 का 22) में शामिल सुरक्षा संबंधित किसी संगठन में काम किया है, सेवानिवृत्ति के बाद संगठन के प्रमुख की पूर्व इजाजत के बगैर कोई ऐसी सामग्री प्रकाशित नहीं करेगा, जो :
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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