
रात में सड़क पर टहल रही थी लड़की, पूछताछ में हुआ सेक्स रैकेट का खुलासा, 4 गिरफ्तार
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भुवनेश्वर में लक्ष्मीनगर इलाके में सेक्स रैकेट का पर्दाफाश. झारखंड की 16 साल की लड़की को सड़क से बचाया गया, लेकिन जांच में पता चला कि वह यौन शोषण की शिकार थी. पुलिस ने छापा मारा, 2 महिला दलाल, मकान मालिक और एक रेपिस्ट गिरफ्तार. 3 लड़कियां बचाईं. POCSO और ITPA के तहत केस दर्ज. विपक्ष ने सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाया.
भुवनेश्वर में 16 अक्टूबर की रात को आशोक नगर की सड़क पर एक 16 साल की लड़की को परेशान हालत में देखा गया. एक महिला ने उसे बचाया और कैपिटल हॉस्पिटल में भर्ती कराया. लड़की झारखंड की रहने वाली है. शुरू में लगा कि वह सड़क पर भटक रही थी, लेकिन डॉक्टरों और पुलिस की जांच में पता चला कि वह यौन शोषण की शिकार हुई है. यह मामला इतना बड़ा निकला कि पूरे सेक्स रैकेट का पर्दाफाश हो गया. डीसीपी जगमोहन मीणा ने बताया कि बचाने वाली महिला खुद रैकेट में शामिल थी.
पुलिस की सतर्कता और छापेमारी पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से ऑटो रिक्शा ड्राइवर को ढूंढा, जिसकी मदद से आरोपी महिला तक पहुंची. इसके बाद लक्ष्मीसागर इलाके में छापा मारा गया. वहां अमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत कई उल्लंघन मिले. दो महिला दलाल, मकान मालिक और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. यह व्यक्ति ही नाबालिग लड़की के साथ रेप का आरोपी है. छापे में तीन और लड़कियां मिलीं, जिन्हें जबरदस्ती सेक्स वर्क में धकेला गया था. सभी को सुरक्षित बचा लिया गया. पीड़ित लड़की अभी भी कैपिटल हॉस्पिटल में इलाज करा रही है.
कानूनी कार्रवाई और दोहरी FIR पुलिस ने दो अलग-अलग केस दर्ज किए. पहला केस कैपिटल थाने में POCSO एक्ट और यौन शोषण की धाराओं के तहत. दूसरा लक्ष्मीसागर थाने में अमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत. कुल चार लोग गिरफ्त में हैं. डीसीपी ने कहा कि जांच जारी है और और आरोपी ढूंढे जा रहे हैं.
इधर, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को हॉस्पिटल में पीड़ित लड़की से मिलने की इजाजत नहीं मिली. नेता जयश्री पटनायक ने इसका विरोध किया. बीजेडी महिला विंग की नेता सुलता देव, सुमित्रा जेना और रंजिता साहू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी सरकार को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि 16 महीने की बीजेपी सरकार में महिलाओं पर 37,750 से ज्यादा मामले दर्ज हुए, जिनमें रेप, छेड़छाड़ और हत्या शामिल हैं. विपक्ष के बार-बार विरोध के बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाए गए.

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