
राज्यसभा चुनाव से पहले हिमाचल कांग्रेस में बवाल, धूमल को हराने वाले राजेंद्र राणा बोले- अब मंत्री पद नहीं लूंगा
AajTak
राज्यसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश की एक सीट पर पेच फंसा है. बीजेपी से सीधी फाइट के बीच अब पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले राजेंद्र राणा के रुख ने कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है. राणा ने दो टूक कहा है कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर बात चल रही है लेकिन अब ये स्वीकार नहीं करूंगा.
हिमाचल प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के लिए हो रहे चुनाव से ठीक पहले विधायक राजेंद्र राणा ने कांग्रेस को तेवर दिखाए हैं. साल 2017 के हिमाचल चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को हराने वाले राजेंद्र राणा का सुक्खू सरकार में मंत्री पद तय माना जा रहा था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब राजेंद्र राणा ने इसका जिक्र करते हुए इशारों-इशारों में अपनी ही पार्टी पर हमला बोला है. उन्होंने दो टूक कहा है कि अब वह कोई मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे.
राजेंद्र राणा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र सुजानपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे मतदाताओं ने मुझसे कहा कि आप जहां खड़े होंगे, हम साथ हैं. सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि उनको मंत्रिमंडल में शामिल करने की बात चल रही है लेकिन सुजानपुर झूठ स्वीकार करने में विश्वास नहीं करती. अब मंत्री बनने का सवाल ही नहीं है. राणा ने यह भी कहा कि हाल ही में मंत्रियों की सूची से उनका नाम हटा दिया गया.
यह भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव के लिए हर दल दूसरे के विधायकों पर डाल रहा डोरे... हिमाचल, यूपी से कर्नाटक तक हलचल
उन्होंने इसे सुजानपुर क्षेत्र के मतदाताओं के सम्मान से भी जोड़ा. कांग्रेस विधायक ने कहा कि यह केवल मेरे संबंध में नहीं है, यह सुजानपुर के मतदाताओं के सम्मान से जुड़ा है जिन्होंने कांग्रेस को वोट देकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति बदल दी. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक राजेंद्र राणा ने कहा कि 14 महीने गुजर गए और कैबिनेट का विस्तार भी हुआ. उन्होंने साफ कहा कि अब हम मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे.
यह भी पढ़ें: हिमाचल की जगह गुजरात से राज्यसभा क्यों भेजे जा रहे जेपी नड्डा? समझें सियासी समीकरण
राजेंद्र राणा ने कहा कि पिछले साल 5 मार्च को होली मेले के दौरान सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सुजानपुर को लेकर कई ऐलान किए थे लेकिन उनमें से केवल दो ही पूरी हुई हैं. उन्होंने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट समेत सभी परीक्षा के नतीजे जल्द घोषित करने की वकालत की. गौरतलब है कि सुजानपुर के विधायक ने हाल ही में सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर कहा था कि सरकार गठन के 14 महीने बाद भी युवा नौकरी के लिए इंतजार कर रहे हैं.

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









