
राजस्थान में कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम बताने में देर क्यों कर रही है?
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राजस्थान में कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम बताने में देर क्यों कर रही है, दिल्ली में दस हज़ार सिविल डिफ़ेंस वालंटियर्स की नौकरी ख़तरे में क्यों है और केंद्रीय कर्मचारियों के DA में बढ़ोतरी करने से सरकारी खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा? सुनिए 'आज का दिन' में.
अगले महीने पांच राज्यों में चुनाव हैं. कांग्रेस मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिज़ोरम इन सभी राज्यों में उम्मीदवारों की पहली या दूसरी लिस्ट जारी कर चुकी है. राजस्थान, जहां कांग्रेस की सरकार भी है, उम्मीदवारों के नाम सामने आने का इंतज़ार है. कल सुबह दिल्ली में कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई. उम्मीद थी देर रात तक ही सही पहले लिस्ट पर मुहर लग जाएगी. बताया जा रहा है सौ से ज़्यादा नामों पर सहमती भी बन चुकी है. दिल्ली में हुई बैठक में जाने से पहले सीएम अशोक गहलोत ने मंत्री और विधायकों के टिकट को लेकर पैरवी करते हुए मीडिया के सामने कहा था कि जिन विधायकों ने कांग्रेस की सरकार बचाई थी, उनका टिकट नहीं कटना चाहिए, उन्हें दोबारा मौका देना चाहिए.
साथ ही वो उन निर्दलीय विधायकों का नाम भी लिस्ट में शामिल करना चाहते हैं, जिन्होंने ऑपरेशन लोटस को नाकाम करने में उनका साथ दिया था. अशोक गहलोत ने सिर्फ़ गुडविल को बचाए रखने के लिए उम्मीदवारों की लिस्ट रोक रखी है या दो गुटों में बंटे राजस्थान कांग्रेस में बड़ा हिस्सा अपने पास रखने की भी खींचा तानी चल रही है, क्या है देरी का असल कारण? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.
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राजस्थान में कांग्रेस उम्मीदवारों पर फ़ैसला नहीं ले पा रही है, लेकिन बताया जा रहा है दिल्ली की सरकार ने एक फ़ैसला ले लिया है. दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार 10 हजार से अधिक सिविल डिफेंस वॉलंटियर्स की सेवा समाप्त कर सकती है. इन लोगों को इस साल अप्रैल से सैलरी नहीं मिली है. सैलरी जारी करने की माँग को लेकर ये लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र शासित प्रदेश के 40 विभागों में ये वॉलंटियर अपनी सेवा दे रहे हैं. दिल्ली में रहने वाले इन्हें बस में सुरक्षा के लिए तैनात, चौक-चौराहे पर जागरुकता फ़ैलाने के काम लगे हुए देख सकते हैं. बताया जा रहा है अक्टूबर के अंत तक इनलोगों को नौकरी से निकाला जा सकता है, यानी दिवाली से पहले बेरोज़गारी. एक अनुमान के मुताबिक इन वॉलंटियर्स को वेतन के लिए दिल्ली सरकार सालान 400 करोड़ रुपये देती है. इनमें से 280 करोड़ रुपए का वेतन बस में चलने वाले मार्शलों के खातों में जाता है.
एक सप्ताह पहले ही मंगलवार को दिल्ली परिवहन निगम की बसों में तैनात मार्शल्स ने बकाये वेतन के भुगतान के लिए सड़क जाम किया था. अधिकारियों का कहना है कि सिविल डिफेंस वॉलंटियर की तैनाती नागरिक सुरक्षा अधिनियम के मुताबिक नहीं है, इसलिए उन्हें हटा कर क़ानूनी रूप देने की तैयारी हो रही है सरकार का इस मुद्दे पर क्या कहना है? 'आज का दिन' में सुनने के लिए क्लिक करें.

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