
यूपी: 18 वर्ष बाद फ़र्ज़ी एनकाउंटर मामले में 18 पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ हत्या का केस दर्ज
The Wire
आरोप है कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले के जलालाबाद में 18 साल पहले अक्टूबर 2004 में तत्कालीन एसपी सहित 18 पुलिसकर्मियों ने दो ग्रामीणों को पकड़कर उनके गले में कारतूस की पेटी बांधकर तथा एक-एक बंदूक दोनों के कंधे पर लटकाकर उन्हें गोलियों से भून दिया था. बाद में पुलिसकर्मियों ने उन्हें डकैतों के गिरोह का सदस्य बता दिया था. अदालत के आदेश के बाद इनके ख़िलाफ़ केस दर्ज किया गया है.
शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक एस. आनंद ने शनिवार को यह जानकारी पत्रकारों को दी. उन्होंने बताया कि अदालत के आदेश पर थाना जलालाबाद में 18 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है तथा इस मामले की जांच अपराध शाखा (Crime Branch) को सौंप दी गई है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जलालाबाद थाने के प्रभारी जय शंकर सिंह ने कहा कि मजिस्ट्रियल जांच में भी पुलिसकर्मियों को क्लीनचिट दे दी गई थी. उन्होंने कहा, ‘मामले में नामित लगभग सभी पुलिस अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं.’
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता एजाज हसन खां ने बताया कि तीन अक्टूबर 2004 को थाना जलालाबाद के चचुआपुर गांव के ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर कटरी गए थे तथा वहीं पर प्रह्लाद अपने खेत की जुताई कर रहे थे. इसी बीच लगभग 18 पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और खेत जोत रहे प्रह्लाद तथा धनपाल को पकड़ लिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद पुलिसकर्मियों ने दोनों के गले में कारतूस की पेटी बांधी तथा एक-एक बंदूक दोनों के कंधे पर लटकाकर एवं हाथ बांधकर कटरी के पतेल में ले जाकर उन्हें गोलियों से भून दिया. बाद में उनके शव को पुलिसकर्मी अपनी जीप में डालकर ले गए और उन्हें डकैतों के गिरोह का सदस्य बता दिया था.

आरजी कर अस्पताल में बलात्कार और हत्या की शिकार जूनियर डॉक्टर की मां ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पनिहाटी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति दे दी है. प्रदेश भाजपा की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. हालांकि भाजपा ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें इस सीट पर कोई प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है.

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि देशभर में 2017 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंक की ख़तरनाक सफाई के दौरान 622 सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है. 539 परिवारों को पूरा मुआवज़ा दिया गया, जबकि 25 परिवारों को आंशिक मुआवज़ा मिला. मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश 86 के साथ सबसे ऊपर है, इसके बाद महाराष्ट्र (82), तमिलनाडु (77), हरियाणा (76), गुजरात (73) और दिल्ली (62) का स्थान है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कोटद्वार के ‘मोहम्मद’ दीपक की याचिका पर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि एक 'संदिग्ध आरोपी' होने के नाते वह अपनी मनचाही राहत, जैसे सुरक्षा और पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय जांच की मांग नहीं कर सकते. दीपक ने बीते महीने कोटद्वार में एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा की जा रही बदसलूकी का विरोध किया था.

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.

मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?



