
यूपी: गोरखनाथ मंदिर के पास रहने वाले मुस्लिम परिवार क्यों छत छिनने के डर से ख़ौफ़ज़दा हैं
The Wire
ग्राउंड रिपोर्ट: बीते दिनों गोरखपुर प्रशासन पर गोरखनाथ मंदिर के पास ज़मीन अधिग्रहण के लिए यहां के रहवासी कई मुस्लिम परिवारों से जबरन सहमति पत्र पर दस्तख़त करवाने का आरोप लगा है. कई परिवारों का कहना है कि उन्होंने एक कागज़ पर साइन तो कर दिए, लेकिन वे अपना घर नहीं छोड़ना चाहते हैं.
गोरखपुर: गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर के पास एक दर्जन से अधिक घरों को ‘मंदिर की सुरक्षा के दृष्टिगत पुलिस बल की तैनाती के लिए’ हटाने की कथित योजना विवाद में आ गई है. प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्हें पूरी जानकारी दिए बिना दबाव में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए जबकि वे अपना घर-बार छोड़कर जाना नहीं चाहते क्योंकि यही उनकी रिहाइश और आजीविका का आधार है. गोरखपुर में गोरखनाथ मंदिर से लगे मुस्लिम घरों को खाली करने की नोटिस दिए जाने के मामले में DM से बात करने पर मेरे साथ अभद्रता की गई और अफवाह फैलाने का आरोप लगाते हुए NSA लगाने की धमकी दी गई जिसकी शिकायत मैंने NHRC को दर्ज कराई है.@pbhushan1 @svaradarajan @seemamustafa pic.twitter.com/7CM0j1UzbG उधर जिला प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा योजना अभी प्रारंभिक चरण में है और किसी से जोर-जबरदस्ती नहीं की जा रही है. सभी परिवारों ने बिना दबाव के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं. — Masihuzzama Ansari (مسیح الزماں انصاری) (@ansari_masi) June 3, 2021 इस मसले में ‘कथित सहमति पत्र’ पर दस्तखत करने वाले लोग डरे हुए और चिंतित है. अधिकतर अपना फोन बंद किए हुए हैं या उठा नहीं रहे हैं. द वायर से बात करते हुए तीन परिवारों ने कहा कि उनसे सहमति पत्र पर दस्तखत लिए गए हैं. तहसील से आए लेखपाल और कानूनगो ने उनके घर की नाप-जोख भी की. एक परिवार का कहना था कि उनसे राजस्वकर्मियों ने मकान को अधिग्रहीत किए जाने के बारे में बातचीत की, लेकिन उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें लिखित रूप से कोई नोटिस आदि मिलेगा, तभी वे जवाब दे पाएंगे.
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार भले ही एलपीजी की किल्लत से इनकार कर रही है लेकिन गैस एजेंसियों पर लंबी क़तारें हैं. गैस की किल्लत से जूझते लोगों के वीडियो सोशल मीडिया पर आ रहे हैं. वहीं, दिल्ली में कुछ अटल कैंटीन बंद हैं, कई हॉस्टल मेस और गुरुद्वारों में लंगर भी सिलेंडर की कमी प्रभावित हो रहे हैं.

मनरेगा के राज्य-स्तरीय तथ्य एक राजनीतिक रूप से असहज स्वरूप दिखाते हैं. यह कार्यक्रम उन इलाकों में सबसे सफल नहीं रहा जहां ज़रूरत सबसे ज़्यादा थी, बल्कि वहां बेहतर रहा जहां प्रशासनिक ढांचा मज़बूत और राजनीतिक इच्छाशक्ति स्पष्ट थी. केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है, ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?

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