
यूपी के मंत्री ने कथित तौर पर इस्तीफ़े की पेशकश की, दलित होने से अनदेखी का आरोप
The Wire
सोशल मीडिया को उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री दिनेश खटीक द्वारा गृह मंत्री अमित शाह को भेजा गया कथित त्याग-पत्र वायरल हो रहा है. इसमें उन्होंने उन्हें 100 दिनों से कोई काम नहीं दिए जाने का दावा करने के साथ विभागीय तबादलों में अनियमितता का आरोप लगाया है. इधर, बताया जा रहा है कि योगी सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री जितिन प्रसाद अपने ओएसडी को निलंबित किए जाने से नाराज़ हैं और भाजपा नेतृत्व से मिलने दिल्ली गए हुए हैं.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री दिनेश खटीक ने कथित तौर पर दलित होने के चलते विभागीय अधिकारियों द्वारा उनकी अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की है. मंत्री ने विभाग में भ्रष्टाचार होने का आरोप भी लगाया है. जहाँ मंत्री होने का सम्मान तो नहीं परंतु दलित होने का अपमान मिले… ऐसी भेदभावपूर्ण भाजपा सरकार से त्यागपत्र देना ही अपने समाज का मान रखने के लिए यथोचित उपाय है। उप्र भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार और कुशासन की क्रॉनॉलॉजी समझिए: #UttarPradesh Minister of State for Jal Shakti department #DineshKhatik, reportedly resigned from the #YogiAdityanath-led government in the state.
खटीक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित एक कथित पत्र में इस्तीफे की पेशकश की है. यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. कभी-कभी बुलडोज़र उल्टा भी चलता है। – पहले लोक निर्माण विभाग के मंत्रालय में विद्रोह – फिर स्वास्थ्य मंत्रालय में विद्रोह – अब जल शक्ति मंत्रालय में विद्रोह Khatik, who represents the Hastinapur Assembly constituency in UP, sent his resignation letter to Union Home Minister #AmitShah. pic.twitter.com/cEsvtZ2xlg
खटीक ने अपने पत्र में दावा किया है कि उन्हें 100 दिनों से कोई काम नहीं दिया गया है. विभागीय तबादलों में अनियमितता का आरोप लगाने वाले पत्र में वे कहते हैं, ‘मैं इसलिए इस्तीफा दे रहा हूं, क्योंकि मैं आहत हूं.’ — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 20, 2022 जनता पूछ रही है, उप्र की भाजपा सरकार ईमानदारी से बताए… अब अगली बारी किसकी है? — IANS (@ians_india) July 20, 2022
वह कथित तौर पर लिखते हैं, ‘मुझे कोई महत्व नहीं दिया गया, क्योंकि मैं एक दलित हूं. मेरे पास एक मंत्री के रूप में कोई अधिकार नहीं है. राज्य मंत्री के रूप में मेरा काम करना दलित समुदाय के लिए एक बेकार है. मुझे किसी बैठक के लिए नहीं बुलाया गया और न ही अपने मंत्रालय के बारे में कुछ भी बताया गया. यह दलित समुदाय का अपमान है.’ — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 20, 2022

यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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