
यहां ऑफिस के अंदर जूते पहनकर आना है मना... जानिए बॉस ने क्यों बनाया ये अजीब रूल
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भारत अपनी संस्कृति के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं. विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग आज भी उन्हें फॉलो करते हैं. साल 2022 में स्थापित एआई कोडिंग स्टार्टअप कर्सर अपनी 'जूते पहनकर प्रवेश वर्जित' नीति के लिए जाना जाते हैं.
कैलिफोर्निया में एक बड़ी स्टार्टअप कंपनी है जिसके सह-संस्थापक भारतीय मूल के हैं, वह अपनी अनोखी ऑफिस पॉलिसी को लेकर चर्चा में हैं. कंपनी ने वर्क प्लेस पर जूते पहनने पर रोक लगा रखी है. इस अनोखे नियम ने न सिर्फ कर्मचारियों का ध्यान खींचा है बल्कि कॉर्पोरेट वर्ल्ड में भी नई बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर एक फोटो तेजी से वायरल हो रही है. कैलिफोर्निया स्थित एक टेक्निशियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्श पर जूतों से भरा एक पोस्ट शेयर किया और कैप्शन में लिखा है कि मजेदार बात यह है कि सैन फ्रांसिस्को में हर कोई तुरंत जानता है कि यह ऑफिस किसका है ?
पोस्ट के कमेंट सेक्शन में तुरंत ही लोगों के ऐसे कमेंट्स आने लगे कि यह कर्सर के ऑफिस जैसा दिखता है जो एक एआई स्टार्टअप है और ऑफिस में जूते न पहनने की नीति का पालन करता है.
वायरल पोस्ट
क्यूपर्टिनो स्थित डेवलपर आंद्रे लैंडग्राफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तस्वीर शेयर की जिसमें लकड़ी के फर्श पर कई जोड़ी जूते बिखरे हुए दिखाई दे रहे हैं. उन्होंने लिखा कि मजेदार बात यह है कि सैन फ्रांसिस्को में हर कोई तुरंत जानता है कि यह कौन सा ऑफिस है. इसके जवाब से कमेंट सेशन में बाढ़ आ गई. जवाब कर्सर ऑफिस. दूसरे व्यक्ति ने लिखा कि कर्सर ही होना चाहिए.
क्या है कर्सर?
बता दें कि कर्सर एक AI-संचालित कोडिंग स्टार्टअप है जो कर्सर बनाने के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है. एक स्मार्ट कोड एडिटर जो डेवलपर्स को AI का यूज करके कोड को तेजी से लिखने, एडिट करने और समझने में मदद करता है. नवंबर 2025 में इसने, करीब 29.3 बिलियन डॉलर के पोस्ट-मनी मूल्यांकन पर 2.3 बिलियन डॉलर का फंडिंग राउंड पूरा किया था. कर्सर की स्थापना साल 2022 में माइकल ट्रूएल (CEO), अमन संगर, सुआलेह आसिफ और अरविंद लुन्नेमार्क ने किया था. इसके चार सह-संस्थापकों में से एक भारतीय मूल का है अमन संगर मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के उन चार पूर्व छात्रों में से एक हैं जिन्होंने लगभग चार साल पहले कर्सर की शुरुआत की थी.

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