
'मैंने अपने ही समुदाय की आलोचना झेली, लेकिन...', SC-ST में क्रीमी लेयर फैसले पर क्या बोले CJI बीआर गवई?
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सीजेआई बीआर गवई ने कहा कि आरक्षित वर्ग से पहली पीढ़ी IAS बनती है, फिर दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी उसी कोटे का लाभ लेती है. उन्होंने सवाल किया कि क्या मुंबई या दिल्ली के सर्वश्रेष्ठ स्कूलों में पढ़ने वाला, हर सुविधा से लैस बच्चा ग्रामीण मजदूर या खेतिहर के बच्चे के बराबर हो सकता है?
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई ने शनिवार को गोवा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन में दिए अपने भाषण में कहा कि कार्यपालिका को जज की भूमिका निभाने की इजाजत देना संविधान में निहित 'सेपरेशन ऑफ पावर' के सिद्धांत को कमजोर करता है.
बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'मुझे गर्व है कि हमने कार्यपालिका को जज बनने से रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए. संविधान कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बीच सेपरेशन ऑफ पावर को मान्यता देता है. अगर कार्यपालिका को यह अधिकार दे दिया गया, तो यह संवैधानिक ढांचे को गहरी चोट पहुंचाएगा.'
सीजेआई गवई ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ अपने फैसले का जिक्र करते हुए कहा, 'संविधान के संरक्षक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करें. हमने सुनिश्चित किया कि बिना उचित प्रक्रिया के किसी का घर न उजाड़ा जाए.' उन्होंने इस फैसले को नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया.
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जनता की इच्छाओं या दबाव में नहीं होते फैसले: CJI
क्रीमी लेयर और अनुसूचित जाति में उप-वर्गीकरण पर अपने विवादास्पद फैसले का उल्लेख करते हुए CJI गवई ने कहा, 'मेरे इस फैसले की मेरी अपनी कम्युनिटी ने कड़ी आलोचना की, लेकिन मैं हमेशा मानता हूं कि फैसला जनता की इच्छाओं या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि कानून और अपनी अंतरात्मा के अनुसार होना चाहिए.'

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