
मेरे देखे हुए दो अलग-अलग कश्मीर और 'पहलगाम' के बाद महमूदा का कॉल, 'मैडम यहां मत आना, माहौल खराब है!'
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कश्मीर एक बार फिर आतंकी हमले से दहल गया है. पहलगाम के बैसारन में देशभर से घूमने आए टूरिस्टों को आतंकियों ने धर्म पूछ-पूछकर निशाना बनाया. बेगुनाह लोगों की मौत से देशभर में मातम का माहौल है. एक झटके में आतंकियों ने 28 निर्दोष लोगों की लाशें बिछा दीं.
दहशत में डूबी महिलाएं... चीखते हुए पर्यटक... और दिल दहलाने वाली तस्वीरें.. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने एक बार फिर आतंक का खूनी खेल खेला है. धर्म पूछ-पूछकर 28 लाशें बिछा दी गईं. जो बच गए उनकी तस्वीरें दर्द की गहरी कहानी लिख गईं. हमले के बाद के हालात तस्वीरों के जरिए सामने आए. कहीं बुजुर्ग महिलाएं बिलखती दिखाई दीं, कहीं पति की लाश के पास बैठी रोती महिला नजर आईं.
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने हर किसी का दिल दहला दिया. पहलगाम में यात्रा करने के लिए टूरिस्टों को पल भर की खुशियां न मिल सकीं और जिंदगी भर का गम मिल गया. इस हमले में कई परिवार बिखर गए. पहलगाम की खूबसूरत वादी को 'मिनी स्विट्जरलैंड' कहा जाता है, इसी वादी को आतंकियों ने खून से लाल कर दिया. यह वही इलाका है, जहां मैं कई साल पहले घूमने गई थी. अनजान शहर, अनजान लोग, और मन में एक डर, लेकिन तब वहां की खूबसूरती और शांति ने मेरा दिल जीत लिया था. आज उसी जन्नत पर एक दाग लगाकर आतंकियों ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है.
'मैं आतंकवादी नहीं....'
पहलगाम के जिस बैसरन घाटी में ये हमला हुआ वो बेहद खूबसूरत इलाका है. 2010 अप्रैल का महीना था और तारीख भी 22- 21 रही होगी. पहली बार 15 साल पहले जब कश्मीर गई तो दिल में अजीब सा डर था, हमेशा कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं के बारे में सुनती, पढ़ती आई थी, इसलिए थोड़ा परेशान थी.
अपनी कश्मीर यात्रा के दूसरे दिन ही मैं पहलगाम गई थी, श्रीनगर से करीब ढाई घंटे का सफर मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत सफर था, चारों तरफ हरियाली ऊंचे-ऊंचे पहाड़... मैं बिंदास अपनी कार रास्ते में रोक रोककर बिना किसी डर के घूम रही थी, उन खूबसूरत नजारों की तस्वीरें आज भी मेरे मोबाइल में कैद में हैं. पहलगाम पहुंचने के बाद बैसरन घाटी के लिए घोड़े से जाना होता है. मुझे देखते ही कई घोड़े वाले ऊपर ले जाने के लिए खड़े हो गए, उन लोगों को देखकर मुझे थोड़ा डर लगा, क्योंकि वहां कोई सिक्योरिटी फोर्स नहीं थी और लोग मुझे अजीब से लग रहे थे. मैं बार-बार मना कर रही थी कि मैं पैदल ही चली जाऊंगी.
तभी एक घोड़े वाला मेरे सामने आकर बोला, मैडम डरिए मत... मैं ले चलूंगा, आपको कुछ नहीं होगा, मैं न चाहते हुए भी उसके घोड़े पर बैठ गई. वो धीरे से बोला- मैडम मेरा नाम इमरान है, मैं घोड़े वाला हूं, आतंकवादी नहीं. मैंने कब कहा- तुम आतंकवादी हो? वो खड़े होकर बोला- मैडम कुछ लोगों ने माहौल खराब कर दिया, उनकी गलती की सजा हम लोग भुगत रहे हैं, लेकिन हम लोग तो टूरिस्ट को घुमाकर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं. ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होता हुआ घोड़ा मेरी मंजिल की तरफ ले जा रहा था, मेरी डर के मारे जान जा रही थी.

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