
'मेरी कोशिश विपक्ष को एकजुट करना, PM पद का दावेदार नहीं', बोले शरद पवार
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एनसीपी चीफ शरद पवार ने सोमवार को एक बार फिर विपक्षी एकता को धार देने की बात की. उन्होंने कहा कि मेरी कोशिश विपक्ष को साथ लाने की है, ऐसी ही कोशिश बिहार के सीएम नीतीश कुमार कर रहे हैं.' इसके साथ ही एनसीपी चीफ ने कहा कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो पीएम उम्मीदवार बनने का सवाल ही कहां है.
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बाद विपक्षी एकता को एक बार फिर पंख लग गए हैं. राज्यों में विपक्ष के नेताओं की इसे लेकर चहलकदमी बढ़ गई है और एक बार फिर से हाथ से हाथ मिलाने, कंधे से कंधा जोड़कर चलने और एक साथ उठ खड़े होने जैसी कवायद शुरू हो गई हैं. मुलाकातों के दौर बढ़ गए हैं और तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं. कुल मिलाकर बहुत तेजी से विपक्षी एकता का छाता ताना जा रहा है, देखना ये है कि इस छाते के तले कौन कौन आ रहा है. इन सब कवायदों के बीच सबसे अहम है शरद पवार का बयान. सोमवार को उन्होंने एक बार फिर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है और यह भी कह दिया वह प्रधानमंत्री की रेस में नहीं हैं.
मैं पीएम बनने की रेस में नहींः शरद पवार जानकारी के मुताबिक, मुंबई में शरद पवार ने कहा, 'मेरी कोशिश विपक्ष को साथ लाने की है, ऐसी ही कोशिश बिहार के सीएम नीतीश कुमार कर रहे हैं.' इसके साथ ही एनसीपी चीफ ने कहा कि वे अगला चुनाव नहीं लड़ रहे हैं तो पीएम उम्मीदवार बनने का सवाल ही कहां है. शरद पवार ने साफ किया किया कि वह पीएम बनने की रेस में नहीं हैं, उन्होंने कहा कि 'हमें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो देश के विकास के लिए काम कर सके.'
राहुल गांधी की तारीफ की कर्नाटक में कांग्रेस की जीत पर पवार ने राहुल गांधी की तारीफ भी की. इस दौरान उन्होंने कहा कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे राहुल गांधी की पदयात्रा की सफलता का सबसे अच्छा उदाहरण हैं. राहुल गांधी के बारे में कोई कुछ भी कहे, मुझे यकीन है कि लोग राहुल गांधी की विचारधारा को मजबूत करेंगे. हालांकि बीते दिनों में कई मौकों पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से राहुल गांधी का उन मुद्दों पर साथ नहीं दिया था, जिनके जरिए वह पीएम मोदी को घेरना चाह रहे थे. इनमें अडानी मामला, सावरकर विवाद जैसे मामले प्रमुखता से शामिल थे.
सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप सोमवार को, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा राज्य के एनसीपी अध्यक्ष जयंत पाटिल से पूछताछ का जिक्र करते हुए, पवार ने सरकार की आलोचना की. उन्होंने यह कहते हुए केंद्रीय जांच एजेंसियों के घोर दुरुपयोग का आरोप लगाया कि इसके जरिए सरकार विपक्षी नेताओं को परेशान करने की मंशा रखती है. उन्होंने कहा कि हो सकता है कि भाजपा एनसीपी का इस तरीके से उत्पीड़न कर हमसे कुछ हासिल करना चाहती हो, हम उन्हें संतुष्ट नहीं करने जा रहे हैं.
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शरद पवार ने कहा कि ईडी, सीबीआई का जिस तरह से गलत उपयोग किया जा रहा है इसका उदाहरण महाराष्ट्र में दिख रहा है. हमारे पास एक लिस्ट है. एनसीपी के 10 नेताओं को एन्क्वायरी के लिए बुलाया गया. अनिल देशमुख को 13-14 महीने जेल में रखा. शुरुआत में उनपर शिक्षण संस्था के लिए 100 करोड़ रुपये लेने का केस लगाया था और एन्क्वायरी के बाद जो आरोपपत्र दाखिल किया तो 100 करोड़ की रकम 1.5 करोड़ पर आ गई. यह सब अतिरंजित आरोप है. परमबीर सिंह पर कितने केस हैं, उसकी एन्क्वायरी सरकार को करनी चाहिए. शरद पवार ने नोटबंदी पर भी बात की. कहा कि नोटबंदी के संदर्भ में जो डिसिजन लिया गया है वह एक तरह से मनमर्जी के मुताबिक निर्णय लेने जैसा है. पिछली बार भी ऐसा ही निर्णय लिया और उस वजह से लोगों का बड़ा नुकसान हुआ है.

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