
मूसेवाला-बाबा सिद्दीकी मर्डर, सलमान के घर हमले से कनेक्शन, लॉरेंस का भाई... अनमोल बिश्नोई की कुंडली
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लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद भारतीय एजेंसियों ने राहत की सांस ली है. मूसेवाला और बाबा सिद्दीकी मर्डर केस के साथ उसका कनेक्शन और सलमान खान के घर पर फायरिंग की साजिश में उसका नाम होना, उसकी गिरफ्तारी की अहमियत को दर्शाता है.
जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का छोटा भाई और वॉन्टेड गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई अब भारत लाया गया है. अमेरिका में ट्रांजिट डिटेंशन के बाद उसे सीधे भारतीय एजेंसियों के हवाले कर दिया गया. भारत पहुंचते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया. अनमोल पर NIA ने 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. वह ऑर्गनाइज्ड क्राइम सिंडिकेट केस का वांटेड आरोपी है, जो वसूली, टारगेट किलिंग और इंटरनेशनल मॉड्यूल चलाने में अहम भूमिका निभाता रहा है.
मूसेवाला से बाबा सिद्दीकी मर्डर केस तक अनमोल का नाम कई हाई-प्रोफाइल वारदातों में सामने आया है. उस पर NCP नेता बाबा सिद्दीकी, सिद्धू मूसेवाला और सलमान खान के घर फायरिंग जैसे मामलों की साजिश रचने का आरोप है. NIA की पूछताछ पूरी होने पर उसे दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच को सौंपा जाएगा. कई राज्यों में उसके खिलाफ दर्ज मामलों को देखते हुए एजेंसियों की लाइन लगी है.
लॉरेंस गैंग का बड़ा नेटवर्क देशभर में लॉरेंस बिश्नोई की क्राइम कंपनी का नेटवर्क फैला है. इसके ऑपरेटिव 13 राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, यूपी, बिहार, बंगाल, एमपी, गुजरात, चंडीगढ़, हिमाचल और उत्तराखंड में फैले हैं. वहीं विदेश में नेटवर्क कनाडा, अमेरिका, पुर्तगाल, दुबई, अजरबैजान, फिलीपींस और लंदन तक सक्रिय बताया जाता है. यही कारण है कि अनमोल सालों तक पकड़ से बाहर रहा.
गैंग का डिजिटल ऑपरेशन और वर्चुअल सिस्टम बिश्नोई गैंग का पूरा ऑपरेशन डिजिटल मॉडल पर चलता है. हर गतिविधि वर्चुअल नंबरों, VPN और सिग्नल ऐप के जरिए होती है. गैंग के करीब 1000 सक्रिय सदस्य हैं और हर शख्स केवल अपने अगले एक व्यक्ति को जानता है. एक टारगेट पर 7–8 अलग-अलग लेयर्स में काम होता है जैसे रैकी, वसूली, हथियार सप्लाई, शेल्टर, फायरिंग और बैकअप. इस मल्टी-लेयर सिस्टम की वजह से पुलिस किसी एक आरोपी से पूरी संरचना नहीं जान पाती.
वफादारी बनाए रखने का फॉर्मूला लॉरेंस बिश्नोई गैंग की सबसे बड़ी ताकत उसकी ‘लॉयल्टी मैनेजमेंट’ रणनीति है. किसी सदस्य को आर्थिक संकट या पारिवारिक दिक्कत हो, तो गैंग उसकी मदद करता है. लॉरेंस जेल में बैठकर भी कैश और सपोर्ट उपलब्ध करवाता रहा. इसी वजह से इसके गैंग में भगोड़े, शूटर और फाइनेंसर बिना टूटे जुड़े रहते हैं.
अनमोल की सुरक्षा, नया सिरदर्दअनमोल बिश्नोई की गिरफ्तारी के बाद उसकी सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन गई है. हाल ही में दुबई में बिश्नोई गैंग के एक फाइनेंसर की हत्या के बाद गैंगवार और बढ़ गया है. भारत की तिहाड़, साबरमती, राजस्थान और पंजाब की जेलों में विरोधी गिरोह के कई सदस्य पहले से बंद हैं, जिससे अनमोल पर खतरा बना रहेगा.

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