
मुस्लिम शासक ने दान दी जमीन, क्रिश्चियन आर्किटेक्ट ने किया डिजाइन... अबू धाबी में बने पहले हिंदू मंदिर की पूरी कहानी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अबू धाबी में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन कर दिया है. ये मंदिर 27 एकड़ में बना हुआ है. इसके लिए जमीन यूएई सरकार ने तोहफे में दी थी. आज जो मंदिर बनकर तैयार हुआ है, उसकी कल्पना 27 साल पहले हुई थी. जानें- इस मंदिर की अब तक की पूरी कहानी...
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में पहला हिंदू मंदिर खुल गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इसका उद्घाटन किया.
ये मंदिर दुबई-अबू धाबी शेख जायद हाईवे के पास अल रहबा में अबु मुरेखा नाम की जगह पर बना है. ये मंदिर बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS ने बनाया है. दुनियाभर में इस संस्था के 1200 से ज्यादा मंदिर हैं. दिल्ली और गुजरात में अक्षरधाम मंदिर इसी संस्था ने बनाया है.
इस मंदिर के लिए जमीन यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने तोहफे में दी है. मंगलवार को भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि साल 2015 में जब उन्होंने मंदिर का प्रस्ताव रखा था, तो क्राउन प्रिंस नाहयान ने यहां तक कह दिया था कि जिस जमीन पर लकीर खींच दोगे, वो मंदिर के लिए दे दूंगा.
अबू धाबी में बने इस मंदिर के लिए यूएई सरकार ने अगस्त 2015 में 13.5 एकड़ जमीन दी थी. इसके बाद 2019 में और 13.5 एकड़ जमीन तोहफे में दे दी. इस तरह कुल 27 एकड़ की जमीन मंदिर के लिए दी गई.
अबू धाबी में मंदिर की कल्पना BAPS के प्रमुख स्वामी महाराज ने 5 अप्रैल 1997 को की थी. उनका मानना था कि अबू धाबी में भी एक मंदिर होना चाहिए, जिससे देश, संस्कृति, समुदाय और धर्म और करीब आ सकें.
अबू धाबी के मंदिर के 7 पड़ाव

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