
'मुझे हिंदू विरोधी कहना पूरी तरह गलत... नहीं स्वीकार करूंगा सरकारी पद', बोले पूर्व CJI बीआर गवई
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पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने इंडिया टुडे/आजतक को दिए इंटरव्यू में जूता फेंकने जाने वाली घटना पर कहा कि मुझे हिंदू विरोध कहना पूरी तरह से गलत था और मुझे नहीं पता उस घटना के पीछे क्या मकसद था. उन्होंने ये भी कहा कि वह रिटायरमेंट के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने इंडिया टुडे/आजतक को दिए विशेष इंटरव्यू में कई मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि उनको 'एंटी-हिंदू' कहा जाना बिल्कुल गलत था. उन्होंने साफ किया कि वह सरकार से कोई भी सेवानिवृत्ति के बाद की जिम्मेदारी नहीं लेंगे. हालांकि, राजनीति में आने से इनकार नहीं किया.
इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई और इंडिया टुडे की एसोसिएट एडिटर अनीषा माथुर ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व सीजेआई से खास बातचीत की, जहां उन्होंने जूता फेंके जाने की घटना से लेकर हेट स्पीच, बुलडोजर जस्टिस, न्यायिक भ्रष्टाचार और राजनीति में जाने की संभावना तक, उन्होंने हर सवाल का स्पष्ट जवाब दिया.
'मैं नहीं जानता घटना का मकसद'
पूर्व जस्टिस गवई ने साक्षात्कार में अपने कार्यकाल के दौरान जूता फेंके जाने की घटना पर कहा, जूता हमले से मुझ पर कोई असर नहीं पड़ा... मैं नहीं जानता उस घटना के पीछे क्या मकसद था. साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदू विरोधी कहना पूरी तरह गलत था.
उन्होंने ये भी कहा कि उस घटना के बाद वे कोर्ट में अपनी टिप्पणियों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं, क्योंकि निर्दोष बातों को भी सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा था.
उन्होंने कोर्ट की टिप्पणियों के सोशल मीडिया कवरेज पर नियमों की बात करते हुए कहा कि कोर्ट की टिप्पणियों के सोशल मीडिया कवरेज पर कुछ नियमन होने चाहिए.

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