
मुंबई में सरकारी दावे फेल, सड़कों पर जलसैलाब... बारिश ने खोला BMC की नाकामी का सच
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मुंबई में हुए तीन दिनों की बारिश ने शहर की सड़कों जलमग्न कर दिया है. बारिश की वजह से लोकल ट्रेन से हवाई यात्रा तक प्रभावित हुई है. लोगों को सहायता पहुंचाने के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं.
हर साल मॉनसून मुंबई वालों के लिए राहत की जगह आफत लेकर आता है. कुछ ही दिन की बारिश में पूरा शहर जलमग्न हो जाता है. लोकल ट्रेनें ठप्प हो जाती हैं, हवाई यात्राएं प्रभावित होती हैं, स्कूल-कॉलेज बंद हो जाते हैं और सड़कें पानी से भर जाती हैं. इस साल भी वसई के मधुबन स्मार्ट सिटी इलाके में इतनी बारिश हुई कि सड़कें और पार्किंग पूरी तरह पानी में डूब गईं. लोग घरों में फंसे रहे और संपर्क टूट गया. पानी की ऊंचाई 5 से साढ़े 5 फीट तक थी. वसई की मीठागर बस्ती में करीब 200-400 लोग पानी में फंस गए. उन्हें बचाने के लिए एनडीआरएफ को बुलाया गया.
मुंबई के अन्य इलाकों की स्थिति भी बेहतर नहीं थी. सायन के सबवे में पानी भर गया, अंडरपास कमर से ऊपर पानी में डूबे, स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए और दफ्तरों में पहुंचना मुश्किल हो गया. कई कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम का आदेश देना पड़ा.
अंधेरी, माटुंगा, दहिसर, विक्रोली ब्रिज और मुंबई-सेंट्रल जैसे इलाके भी जलमग्न हुए. हाईवे पर भी गाड़ियां पानी में फंसी नजर आईं. ठाणे में नारिवली और उत्तरशिव गांव के आसपास सड़कें पूरी तरह जलमग्न हो गईं. मुंबई की नाकामी हर साल दोहराई जा रही है, जबकि BMC का बजट कई राज्यों से ज्यादा है.
मुंबई में मोनोरेल तकनीकी खराबी के कारण फंसी
मुंबई के चेंबूर-भक्ति पार्क एरिया में मोनोरेल तकनीकी खराबी और बारिश की वजह से फंस गई थी. अंदर फंसे यात्रियों को दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेल से निकाला गया है.
मोनोरेल की इलेक्ट्रिसिटी बंद होने के कारण एयर कंडीशनिंग और लाइट काम नहीं कर रही थी. यात्रियों को सफोकेशन और असुविधा महसूस हो रही थी. फायर ब्रिगेड और NDRF की तीन क्रेन लगाई गई और 582 यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया. 12 यात्रियों को अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया.

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