
मुंबई: दिंडोशी सेशन कोर्ट ने सीरियल रेपिस्ट को तीसरे मामले में किया बरी
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मुंबई के दिंडोशी सेशन कोर्ट ने 34 वर्षीय सीरियल रेपिस्ट रियान अब्दुल कुरैशी को एक नाबालिग के बलात्कार के मामले में बरी कर दिया है. कुल 22 मामलों का सामना कर रहे कुरैशी के लिए यह तीसरा मामला है जिसमें उन्हें बरी किया गया. अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई पहचान परेड (TIP) को गंभीर रूप से दोषपूर्ण पाया, जिसके चलते उसे 'संदेह का लाभ' दिया गया.
दिंडोशी सेशन कोर्ट ने सीरियल रेपिस्ट रियान अब्दुल कुरैशी को एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में बरी कर दिया. अदालत ने ये फैसला अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों में खामी के कारण दिया. विशेष न्यायाधीश नीता एस अनेकर ने पाया कि अभियोजन पक्ष ये साबित करने में विफल रहा कि कुरैशी ही अपराधी था. ये तीसरा मामला है, जिसमें उसे बरी किया गया है. 34 वर्षीय सीरियल रेपिस्ट पर मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई समेत बलात्कार के कुल 22 मामले दर्ज हैं.
पीड़ित की मां द्वारा 8 जून, 2017 को गोरेगांव पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई गई थी. कथित तौर पर ये अपराध 6 जून, 2017 को हुआ था. घटना के वक्त पीड़ित की उम्र 11 वर्ष थी.
पीड़ित ने गवाही दी कि एक अज्ञात व्यक्ति उसे उसकी मां द्वारा खरीदे गए गीजर को लेने के बहाने से बहला-फुसलाकर उसके भवन के ग्राउंड फ्लोर से ले गया. इस मामले में कुरैशी पर IPC और POCSO अधिनियम के तहत गंभीर भेदक यौन हमला, बलात्कार, अपहरण और आपराधिक धमकी समेत कई आरोप लगाए गए थे.
पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह व्यक्ति उसे कई इमारतों में ले गया, लेकिन अंत में वह उसे एक छत या सीढ़ी पर ले गया, जहां उसे नाबालिग को कपड़े उतारने को मजबूर किया और फिर दुष्कर्म किया. साथ ही आरोपी ने धमकी दी कि अगर वह चिल्लाई तो वह उसे जान से मार देगा.
मेडिकल सबूत और जांच में देरी
अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी गीता मालनकर ने पीड़िता और उसकी मां के साथ-साथ मेडिकल और पुलिस अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पीड़िता की गवाही घटना के बारे में स्पष्ट और विश्वसनीय थी, जिसकी पुष्टि सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसके बयान से भी होती है. मेडिकल सबूत, जांच में तीन दिन की देरी के कारण कोई गंभीर चोट नहीं दिखी, लेकिन इससे पीड़िता की मौखिक गवाही की विश्वसनीयता कम नहीं होती.

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