
मिशन 2024: वो 5 फैक्टर जिनके बूते विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिश में हैं नीतीश कुमार
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लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी माहौल धीरे-धीरे बनता जा रहा है. 2019 के चुनाव में बिखरा हुआ विपक्ष 2024 में एकजुट होने की कवायद में है. विपक्ष की मजबूरी इस बात की है कि कौन नेता विपक्षी एकजुट का तारणहार बनेगा. ममता बनर्जी से लेकर केजरीवाल के नाम पर कांग्रेस सहमत नहीं है. ऐसे में नीतीश कुमार ने अब विपक्षी एकजुटता बीड़ा उठाया है.
लोकसभा चुनाव में अभी भले ही डेढ़ साल का वक्त बाकी हो, लेकिन सियासी ताना-बाना बुना जाने लगा है. 2024 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चेहरा बनने के लिए नेताओं की फेहरिश्त काफी लंबी है, लेकिन बिखरे हुए विपक्ष की एकता का सूत्रधार कौन होगा, ये सबसे बड़ा सवाल है. ममता बनर्जी से लेकर अरविंद केजरीवाल और तेलंगाना के केसीआर तक अपनी-अपनी कोशिशें कर रहे हैं तो कांग्रेस की भी अपनी दावेदारी है. इस बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पाला बदलने के साथ ही अब विपक्ष को एकजुट करने का बीड़ा उठाया है.
मोदी के खिलाफ 2024 में बनने वाली विपक्षी एकता फिलहाल दो ध्रुवों में बंटी हुई नजर आ रही है. एक तरफ तीसरे मोर्चे की संभावनाएं टटोली जा रही हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस को साथ लेकर नीतीश कुमार ने सभी विपक्षी दलों को एक छतरी के नीचे एकजुट करने की कवायद शुरू की है. मिशन-2024 के तहत नीतीश इन दिनों दिल्ली में डेरा जमाए हुए हैं. इसी कड़ी में नीतीश ने सोमवार को राहुल गांधी और कुमारस्वामी से मुलाकात की थी तो मंगलवार को उनकी मुलाकात सीपीआई (एम) नेता सीताराम येचुरी और अरविंद केजरीवाल से हुई है.
इन तमाम प्रयासों के बीच बड़ा सवाल यही है कि मोदी के सामने विपक्ष का चेहरा कौन? नीतीश कुमार की बात करें तो पांच ऐसे फैक्टर हैं जिनके आधार पर वो 2024 में विपक्ष का चेहरा बनने की कोशिशों में लगे हैं.
1. विपक्ष को नेता की तलाश बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाने और 2024 के चुनाव में नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष का चेहरा बनने की जंग है. राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, केसीआर और नीतीश कुमार तक कई नेता दावेदार हैं. विपक्षी दलों को ऐसे नेता की तलाश है, जिस पर सभी दल एकमत हो सकें. राहुल गांधी के नाम पर ममता, केजरीवाल और केसीआर तैयार नहीं हैं तो कांग्रेस भी इन तीनों में से किसी के नाम पर सहमत नहीं दिख रही है. अब बिहार के सुशासन बाबू नीतीश कुमार ने विपक्षी दलों को एक करने की तैयारी शुरू कर दी है.
तेजस्वी यादव से लेकर अखिलेश यादव तक नीतीश के नाम पर रजामंद हैं तो केसीआर भी साथ खड़े हैं. देवगौड़ा ने भी हरी झंडी दे दी है. ऐसे में नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष की ओर से एक मजबूत नेता की जो तलाश की जा रही है, उसकी भरपाई नीतीश कुमार के रूप में हो सकती है. जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नीतीश कुमार को 2024 के चुनाव विपक्ष का चेहरा बनाने का लक्ष्य तय किया है. ऐसे में माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के चेहरे पर विपक्ष के ज्यादातर दल सहमत हो सकते हैं.
2. नीतीश की साफ सुथरी छवि नीतीश कुमार के पास एक लंबा राजनीतिक अनुभव है. नीतीश बिहार में 15 साल से ज्यादा समय से मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके ऊपर किसी तरह का कोई भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है. नीतीश साफ-सुथरी छवि वाले नेता माने जाते हैं, इस बात को बीजेपी के नेता भी मानते हैं. नीतीश की यह सियायी ताकत उन्हें 2024 के चुनाव में विपक्षी एकता का सूत्रधार ही नहीं बल्कि मोदी के खिलाफ चेहरे बनने में भी मददगार साबित हो सकती है. नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से काफी बैलेंस बनाकर चलने वाले नेताओं में हैं, जिसके चलते सहयोगी दलों को भी किसी तरह की कोई दिक्कत होने की संभावना नहीं दिखती.

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