
मास्क संबंधी आरटीआई पर जानकारी न देने पर सीआईसी ने लगाई फटकार, कहा- घोर लापरवाही
The Wire
एक आरटीआई आवेदन में कोविड महामारी के दौरान मास्क के प्रभाव से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, जिस पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया. केंद्रीय सूचना आयोग ने इस आवेदन को व्यापक जनहित वाला बताते हुए कहा कि मंत्रालय के अधिकारियों ने इसे एक से दूसरी जगह सिर्फ ट्रांसफर करके पोस्ट ऑफिस वाला काम किया है.
नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कोरोना महामारी में मास्क के इस्तेमाल से संबंधित एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन पर जवाब न देने और इसे एक विभाग से दूसरे विभाग में ट्रांसफर करते रहने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई है. आयोग ने मंत्रालय के आरटीआई सेल के अधिकारियों पर गहरी नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में घोर लापरवाही बरती है. मैथ्यू थॉमस नामक एक व्यक्ति ने 26 मई 2020 को एक आरटीआई आवेदन दायर कर कोरोना महामारी के संदर्भ में पूछा था कि किस आधार पर पूरे भारत के लोगों के लिए मास्क अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सलाह, ऐसे दस्तावेज या मिनट्स ऑफ मीटिंग जो ये दर्शाते हो कि मास्क को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार किया गया था, ऐसा कोई दस्तावेज या बैठक का मिनट्स जो ये दर्शाता हो कि केवल मेडिकल मास्क से सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की रक्षा हो सकती है और इसकी जगह पर स्कार्फ या रूमाल से बचाव नहीं होगा बल्कि संक्रमण का खतरा भी होगा, इत्यादि की प्रति मांगी थी.
यह त्रासदी नवंबर 2014 में बिलासपुर ज़िले के नेमिचंद जैन अस्पताल (सकरी), गौरेला, पेंड्रा और मरवाही में आयोजित सरकारी सामूहिक नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी. ज़िला अदालत ने आरोपी सर्जन को ग़ैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और दो साल की क़ैद, 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया. साथ ही पांच अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

वी-डेम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के अंत तक दुनिया में 92 तानाशाही वाले देश और 87 लोकतांत्रिक देश मौजूद थे. भारत अभी भी 'चुनावी तानाशाह' बना हुआ है, इस श्रेणी में वह 2017 में शामिल हुआ था. 179 देशों में सें भारत लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में 105वें स्थान पर है. पिछले वर्ष यह 100वें स्थान पर था.

बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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बीते 3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान लोकसभा द्वारा पारित एक प्रस्ताव के बाद अनुशासनहीन व्यवहार के लिए सात कांग्रेस सांसदों और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद को निलंबित कर दिया गया था. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें इन सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी.

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