
मां ने कॉलेज फीस भरने के लिए बेची चुड़िया, रेलवे प्लेटफॉर्म पर पढ़कर बने साइंटिस्ट, वायरल
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डॉ. ए. वेलुमणि ने सोशल मीडिया पर अपनी संघर्ष भरी जिंदगी की कहानी शेयर की है. कॉलेज के दिनों में आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने रेलवे प्लेटफॉर्म को अपनी पढ़ाई की जगह बना लिया. सैकड़ों घंटे प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई करने की मेहनत ने उन्हें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) तक पहुंचाया.
सोशल मीडिया पर एक ऐसी कहानी वायरल हो रही है, जिसने मेहनत, मां की कुर्बानी और हौसले की असली तस्वीर दिखा दी है. यह कहानी है उस शख़्स की, जिसने कॉलेज के दिनों में किताबें खोलने के लिए न लाइब्रेरी ढूंढी, न कोचिंग—बल्कि एक शांत रेलवे प्लेटफॉर्म को ही अपना क्लासरूम बना लिया. तमिलनाडु के उसी प्लेटफॉर्म पर बैठकर की गई पढ़ाई ने आगे चलकर उन्हें एक सफल वैज्ञानिक बना दिया. इस प्रेरणादायक सफर को डॉ. ए. वेलुमणि ने खुद सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो अब लाखों लोगों को मेहनत और अनुशासन का मतलब समझा रही है.
रेलवे प्लेटफॉर्म बना क्लासरूम डॉ. वेलुमणि ने बताया कि साल 1974 से 1978 के बीच वे कोयंबटूर के श्री रामकृष्ण मिशन विद्यालय में पढ़ते थे. उस समय उनकी आर्थिक हालत बहुत खराब थी. शहर के कॉलेजों में पढ़ाई और हॉस्टल का खर्च उनके बस का नहीं था. इसलिए उन्होंने ऐसा कॉलेज चुना, जहां फीस और रहने का खर्च कम था. हॉस्टल की फीस भी वे नहीं दे पा रहे थे, इसलिए शहर में एक सरकारी मुफ्त हॉस्टल में रहने लगे. लेकिन कॉलेज आने-जाने का किराया भी उनके लिए भारी था.
बस से रोज आना-जाना महंगा पड़ता था. तब उन्होंने पैसेंजर ट्रेन का सहारा लिया, जिसमें छात्रों का पास बहुत सस्ता था. इस फैसले से उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई. सुबह बहुत जल्दी ट्रेन पकड़नी पड़ती थी और शाम को देर से घर लौटते थे. कॉलेज की पढ़ाई के बाद उनके पास रोज़ कई घंटे खाली रहते थे।
आर्थिक तंगी ने बदला पढ़ाई का रास्ता डॉ. वेलुमणि ने लिखा- मैं उन घंटों में रेलवे प्लेटफार्म पर बैठकर मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ता था. उन्होंने बताया कि करीब 1000 दिनों तक और लगभग 6000 घंटे उन्होंने प्लेटफॉर्म पर पढ़ाई की. यही मेहनत आगे चलकर उन्हें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में नौकरी दिलाने में मददगार बनी. उन्होंने यह भी बताया कि उन दिनों उनकी मां ही घर की अकेली कमाने वाली थीं और बहुत कम पैसे कमाती थीं. परिवार पर बोझ न पड़े, इसलिए उन्होंने हर तकलीफ सहन की. एक समय उनकी मां ने कॉलेज की फीस भरने के लिए अपनी चूड़ियां तक बेच दी थीं.

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