
मणिपुर में एक अक्टूबर से करीब 16 जगहों पर हुई हिंसा, अब नागा प्रभाव वाले इलाकों में भी तनाव
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सबसे बड़ी संख्या में लोग 11 नवंबर को मारे गए, जब हमार समुदाय के मिलिटेंट्स ने जिरीबाम के जाकुरधोर और बोरोबेकरा पुलिस थानों के पास केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पोस्टों पर हमला किया. इसके जवाब में 10 मिलिटेंट्स मारे गए.
मणिपुर में एक बार फिर स्थिति नियंत्रण के बाहर जा रही है. ताजा हिंसा में विधायकों और मंत्रियों के घरों को निशाना बनाया गया है. स्थिति पर कंट्रोल के लिए सरकार ने करीब 5,000 अतिरिक्त केंद्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया है. 7 नवंबर को जिरीबाम जिले के जैरावन गांव में हमार समुदाय की एक महिला की हत्या हुई थी. इसके बाद हिंसा भड़क उठी थी.
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1 अक्टूबर से 18 नवंबर के बीच कम से कम 16 अलग-अलग हिंसा की घटनाओं में हत्याएं, आगजनी और जिरीबाम जिले में भारी गोलीबारी के साथ मुठभेड़ें हुईं हैं. जिरीबाम में ही 7 नवंबर से 18 नवंबर के बीच कम से कम 20 लोग मारे गए.
इस अवधि के दौरान हिंसा मुख्य रूप से जिरीबाम और मैती-बहुल घाटी क्षेत्रों में केंद्रित रही.
11 नवंबर को हुआ सबसे बड़ा बवाल
सबसे बड़ी संख्या में लोग 11 नवंबर को मारे गए, जब हमार समुदाय के मिलिटेंट्स ने जिरीबाम के जाकुरधोर और बोरोबेकरा पुलिस थानों के पास केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पोस्टों पर हमला किया. इसके जवाब में 10 मिलिटेंट्स मारे गए. इस हमले के दौरान मिलिटेंट्स ने कई दुकानों और घरों को आग के हवाले कर दिया, जिससे दो नागरिकों की मौत हो गई.

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