
मंगला, भोग, सप्तऋषि आरती... क्या है काशी विश्वनाथ में होने वाली पांच आरतियों का रहस्य और महत्व
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काशी विश्वनाथ मंदिर में दिन में पांच बार होने वाली आरतियाँ शिवजी की दिनचर्या और पंचतत्वों का प्रतीक हैं. मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक, ये पूजा केवल देवता की स्तुति नहीं बल्कि जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं.
महाशिवरात्रि के मौके पर शिव मंदिरों में भीड़ बढ़ जाती है. और जिन शिव मंदिरों में ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं वहां तो श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ होती है कि कहना ही क्या? उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मौजूद काशी विश्वनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. इसके साथ ही आम धारणा है कि काशी शिव की नगरी है.
शिव यहां सिर्फ मंदिर में नहीं हैं, बल्कि यह उनका अपना घर है. इसलिए सिर्फ महाशिवरात्रि पर ही नहीं बल्कि आम दिनों में भी काशी का वैसा ही महत्व बना रहता है. पिछले भाग में आपने ये जाना कि शिवजी के प्रतीकों में पांच की संख्या की मौजूदगी बहुत मिलती है. अब और इसी कड़ी में जानिए कि आखिर काशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाली पांच आरतियों का क्या महत्व है?
सामान्य सी बात जो सभी लोग जानते हैं कि काशी विश्वनाथ मंदिर में पांच बार आरती होती हैं. आरती की ये परंपरा सिर्फ पूजा-पाठ का हिस्सा भर नहीं है. ये बाबा विश्वनाथ की एक पूरे दिन की दिनचर्या का हिस्सा है. काशी में शिव सिर्फ देवता भर नहीं हैं. वह यहां के 'राजा' हैं और पांच बार की आरती उनकी पांच बार की सेवा है.
यही वजह है कि यहां आरती केवल देवता की स्तुति नहीं है, बल्कि सुबह जागने से लेकर रात में उनके सोने तक की पूरी टाइमलाइन बन जाती है. इसके अलावा शिवजी की पांच आरती दुनिया के पंच तत्वों की आराधना के भी प्रतीक हैं. हर एक समय की आरती एक-एक तत्व और शिवजी के एक-एक स्वरूप के लिए होती है.
मंगला आरती का क्या है अर्थ? इसकी शुरुआत मंगला आरती से होती है. इसका समय भोर में 3:00 से 4:00 बजे के बीच का है. इसे ब्रह्न मुहूर्त कहते हैं. माना जाता है कि इस वक्त शिवजी की आरती सभी देवता कर रहे होते हैं. भगवान शिव के जागने का समय होता है. इस समय उनके विग्रह (शिवलिंग) में अपार तेज होता है और यह ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रतीक बन जाता है. मंगला आरती काशी विश्वनाथ मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से प्रभावशाली आरती मानी जाती है. इस समय सृष्टि की चेतना सबसे शुद्ध और स्थिर मानी जाती है.

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