
भारत में कुत्तों का 'आतंक', इस देश में बच्चों को 'रिप्लेस' कर रहे पालतू कुत्ते-बिल्लियां!
AajTak
जापानी कपल अब बच्चे छोड़ कुत्ते-बिल्लियां पालना पसंद कर रहे हैं. देश में लगभग 14 मिलियन बच्चों पर 20 मिलियन से ज्यादा कुत्ते-बिल्लियां हैं. ये योगा करते हैं, पार्टी में शामिल होते हैं और डिजाइनर कपड़े भी पहनते हैं. यहां तक कि थैरेपी डॉग भी हैं, जिनका काम अकेले पड़ चुके लोगों को प्यार देना है.
डॉग बाइट के बढ़ते मामलों के बीच गुरुग्राम में जिला कंज्यूमर फोरम ने कहा कि अब पालतू कुत्तों को बाहर घुमाते वक्त गले में चेन और मुंह पर कवर बांधना होगा, वरना मालिक पर तगड़ा जुर्माना लगेगा. साथ ही विदेशी नस्ल के 11 कुत्तों पर बैन लग गया है. म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ग्रुरुग्राम अब ये पक्का करेगा कि बैन ब्रीड के पेट्स घर पर न रखे जाएं.
इन नस्लों पर लग चुका बैन
अमेरिकन पिटबुल, डॉगो अर्जेंटिनो, रॉटवेलर, निएपॉलियन मेस्टिफ, बुअबुल, प्रेसा केनेरिओ, वोल्फ डॉग, बैंडॉग, अमेरिकन बुलडॉग, फाइला ब्रेसिलाइरो और केन कॉर्सो. अगर किसी के पास पहले से ही इन नस्लों में से कोई पेट हो, तो तुरंत लाइसेंस जब्त करके कुत्ते को कस्टडी में ले लिया जाएगा. अक्टूबर में गाजियाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन भी तीन नस्लों पर बैन लगा चुका.
क्यों मची है खलबली?
बीते सालभर से देश के अलग-अलग हिस्सों, खासकर उत्तरप्रदेश और राजस्थान से डॉग बाइट की घटनाएं रिपोर्ट हो रही हैं. कई मामलों में लोग बुरी तरह से जख्मी हो गए, तो लखनऊ में पिटबुल डॉग के हमले से मालकिन की मौत तक हो गई. यानी कुल मिलाकर देश में कुत्तों का कहर जारी है, जबकि जापान जैसे एशियाई देश में ये इंसानी बच्चों को रिप्लेस कर रहे हैं. ग्लोबल इनवेस्टमेंट कंपनी Goldman Sachs लगातार देशों के आर्थिक ट्रेंड्स देखती रहती है. इसी दौरान उसने पाया कि जापान में बर्थ रेट घट रही है. आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है, दूसरी तरफ युवा जोड़े संतान पैदा करने की बजाए कुत्ते-बिल्ली पाल रहे हैं. खासकर छोटे और एग्जॉटिक कुत्ते, जो कम जगह घेरें और जिनकी आयु भी कम हो.

सैकड़ों साल पहले तबाह हो चुके एक रोमन शहर की दीवार पर करीब 2000 साल पुराने लव लेटर्स लिखे हुए मिले हैं. यह खोज आज की उन्नत और आधुनिक तकनीक का नतीजा है. क्योंकि, जिस दीवार पर ये ग्रैफिटी बने थे, वो काफी पहले खुदाई में मिल गए थे, लेकिन उन पर उकेरे गए भित्तिचित्रों को समझना मुश्किल था. अब जाकर पुरातत्वविदों को इसका मतलब पता चला है.

Shani Nakshatra Gochar 2026: शनि जब रेवती नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन गहराई से देखने को मिलता है. रेवती नक्षत्र मीन राशि का अंतिम नक्षत्र माना जाता है और इसका स्वामी बुध ग्रह है. इसलिए इस अवधि में सोच-समझ, योजना, संवाद और निर्णय क्षमता से जुड़े मामलों में खास बदलाव दिखाई दे सकते हैं.

Aaj 20 February 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 20 फरवरी 2026, दिन- शुक्रवार, फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष, तृतीया तिथि 14.38 बजे तक फिर चतुर्थी तिथि, उत्तर भाद्रपद नक्षत्र 20.07 बजे तक रेवती नक्षत्र, चंद्रमा- मीन में, सूर्य- कुंभ में, अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12.12 बजे से दोपहर 12.58 बजे तक, राहुकाल- सुबह 11.10 बजे से दोपहर 12.35 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.










