
भारत का डिफेंस GPS 'नाविक' संकट में... 11 में सिर्फ 3 सैटेलाइट कर रहे हैं काम, जानिए इसके खतरे
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भारत का स्वदेशी GPS 'नाविक' गंभीर संकट में है. 11 सैटेलाइट में से सिर्फ 3 ही काम कर रहे हैं. इनमें से एक किसी भी समय फेल हो सकता है क्योंकि उसकी उम्र 10 साल से ज्यादा हो चुकी है. नेविगेशन के लिए कम से कम 4 सैटेलाइट जरूरी हैं. इससे सेना की मिसाइल मार्गदर्शन, जहाजों-विमानों की लोकेशन और युद्ध क्षमता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
भारत का अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम 'नाविक' (NAVIC) आज गंभीर संकट में है. इस समय 11 सैटेलाइट में से सिर्फ 3 ही अपना मुख्य काम कर पा रहे हैं. इनमें से एक सैटेलाइट कभी भी फेल हो सकता है क्योंकि उसकी उम्र 10 साल से ज्यादा हो चुकी है. नाविक को मिनिमम 4 सैटेलाइट की जरूरत होती है, लेकिन अभी सिर्फ 3 काम कर रहे हैं. इससे सेना की नेविगेशन, मिसाइल मार्गदर्शन और सटीक हमलों की क्षमता पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.
नाविक क्या है और क्यों बनाया गया?
1999 के कारगिल युद्ध में अमेरिका ने भारत को GPS की सटीक जानकारी देने से इनकार कर दिया था. इससे भारतीय सेना को हिमालय की ऊंची चोटियों में नेविगेशन और सटीक हमले करने में बड़ी मुश्किल हुई. इसी समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने अपना स्वदेशी सिस्टम बनाने का फैसला किया.
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इसरो ने 2013 से 2018 के बीच IRNSS (Indian Regional Navigation Satellite System) सैटेलाइट्स लॉन्च किए, जिसे बाद में नाविक नाम दिया गया. नाविक भारत और उसके 1500 किमी आसपास के क्षेत्र में पोजीशन, नेविगेशन और टाइमिंग सर्विस देता है. यह सिर्फ भारत के लिए है, जबकि अमेरिका का GPS, चीन का बीडौ, यूरोप का गैलीलियो और रूस का ग्लोनास पूरे विश्व में काम करते हैं.

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